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दरभंगा के मजदूर की कुवैत में मौत:परिजनों ने शव भारत लाने की अपील की; 18 साल से करते थे मजदूरी

दरभंगा के मजदूर की कुवैत में मौत हो गई। मृतक के परिजनों की सरकार से अपील है कि पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाया जाए, ताकि चारों बेटे अपने पिता को अंतिम विदाई दे सकें। मजदूर की पहचान कमतौल थाना क्षेत्र स्थित टेकटार पंचायत के मधुपुर गांव निवासी मिथिलेश कुमार दास (48 ) के रूप में हुई है। मिथिलेश कुमार दास पिछले 18 साल से कुवैत में रहकर प्राइवेट जॉब कर रहे थे। ये बेदार अल मुल्ला एंड ब्रदर्स कम्पनी मे मजदूरी करते थे। 8 दिसंबर को ड्यूटी पर जाते वक्त अचानक उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया। साथियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। खबर मिलते ही उनके छोटे भाई रंजीत दास, जो कुवैत में ही दूसरे स्थान पर रहते हैं, दौड़कर अस्पताल पहुंचे। लेकिन, 1 जनवरी 2026 को मिथिलेश कुमार दास ने दम तोड़ दिया। परिवार ने शव को भारत लाने की अपील की मृतक की पत्नी पुनीता देवी ये खबर सुनने के बाद बार-बार बेहोश हो रही हैं। मिथिलेश के 4 बेटे नीरज (18), धीरज (14), आदित्य (12) और दिव्यांशु (8) हैं। मृतक के छोटे भाई सुनील कुमार बताते हैं कि “मेरे भैया पिछले 17–18 साल से कुवैत में रहकर नौकरी कर रहे थे। विदेश में मेहनत-मजदूरी करके हमारे पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। आज वही सहारा हमसे छिन गया। उनके जाने से हमारा पूरा परिवार बिखर गया है।” भाई ने आगे कहा कि “मेरे भैया की एक पत्नी है, छोटे-छोटे 4 मासूम बच्चे हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। घर में मातम पसरा हुआ है, समझ में नहीं आ रहा कि अब क्या करें। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ जोड़कर विनती करते हैं कि मेरे भाई के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द कुवैत से भारत लाने की व्यवस्था की जाए। हम पूरी तरह टूट चुके हैं, सरकार अगर साथ दे दें, तो शायद हम इस दर्द को सह पाएं।” उन्होंने आगे कहा कि “भाई के निधन की खबर जैसे ही इलाके में फैली, पूरे गांव में कोहराम मच गया। दूर-दराज से लोग हमारे घर पहुंच रहे हैं, सभी शोक में डूबे हैं। आज हमारे घर का उजाला बुझ गया है।” मृतक की मां मीना देवी ने कहा कि मेरा बाबू कुवैत में रहता था। अब हम लोगों को कौन देखेगा? हम बूढ़े हो गए हैं। प्रधानमंत्री, हमारे बेटे को जल्दी से जल्दी हमारे पास भिजवा दीजिए। हम उसका आखिरी बार मुंह देखना चाहते हैं। कभी जमीन पर बैठकर, तो कभी आसमान की ओर देखते हुए वह बेसुध होकर विलाप कर रही हैं। बार-बार कहती हैं कि अब हमें समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें, कैसे जिएं। मां की करुण चीत्कार से पूरा घर ही नहीं, बल्कि आसपास का माहौल भी गमगीन हो उठा है। हर सुनने वाले की आंखें नम हो जा रही हैं।


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