बक्सर विधायक आनंद मिश्रा ने विधानसभा सदन में युवाओं के भविष्य से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया। उन्होंने गृह मंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि थानों में दर्ज एफआईआर के कारण बड़ी संख्या में युवाओं को कैरेक्टर सर्टिफिकेट नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें नौकरी से वंचित होना पड़ रहा है। एफआईआर दर्ज हो जाना अपराधी होने का प्रमाण नहीं आनंद मिश्रा ने सदन में कहा कि केवल एफआईआर दर्ज हो जाना किसी व्यक्ति के अपराधी होने का प्रमाण नहीं है। आज के समय में कोई भी किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा देता है, जिससे निर्दोष युवाओं का भविष्य दांव पर लग जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कई छात्र कड़ी मेहनत से बीपीएससी और पुलिस जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर लेते हैं, लेकिन कैरेक्टर सर्टिफिकेट न बनने के कारण उनकी नियुक्ति रुक जाती है। प्रतिभाशाली युवा एफआईआर के कारण अवसर खो देते विधायक ने बताया कि कई मामलों में पड़ोसी या स्थानीय विवाद के कारण दुर्भावनापूर्ण तरीके से एफआईआर दर्ज करा दी जाती है। बाद में जांच में भले ही मामला गलत साबित हो जाए, लेकिन तब तक युवक नौकरी से वंचित रह जाता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि एक प्रतिभाशाली युवा केवल एफआईआर के कारण अवसर खो देता है। आनंद मिश्रा ने सरकार से इस प्रक्रिया में सुधार की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ केवल एफआईआर दर्ज है और अभी तक आरोप साबित नहीं हुए हैं, तो उसे अवसर दिया जाना चाहिए। यदि बाद में चार्जशीट में आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रशिक्षण के दौरान भी आवश्यक कार्रवाई कर उसे सेवा से वापस किया जा सकता है। युवाओं के भविष्य के साथ न्याय होना चाहिए सदर विधायक ने जोर देकर कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ न्याय होना चाहिए और केवल एफआईआर के आधार पर उनके करियर को रोकना उचित नहीं है। उनके इस बयान के बाद सदन में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा होने की संभावना है।
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