तेलंगाना के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला ने काशी में भोजपुरी को हिंदी भाषा के विकास की मजबूत आधारशिला बताया है। उन्होंने यह बात पिंडरा स्थित बनारस पब्लिक स्कूल में आयोजित ‘राहुल सांकृत्यायन लोकभाषा भोजपुरी सम्मान समारोह’ में कही। राज्यपाल शुक्ला ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि करोड़ों लोगों द्वारा बोली जाने वाली यह समृद्ध भाषा आज भी आधिकारिक पहचान के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि भाषाई विवादों के कारण भारत में इस भाषा को वह स्थान नहीं मिल सका, जिसकी यह हकदार है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए बताया कि मॉरीशस जैसे देशों में भोजपुरी को दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। राज्यपाल ने कबीर, तुलसी और राहुल सांकृत्यायन की परंपरा का उल्लेख करते हुए काशी को वैश्विक शोध का केंद्र बताया। उन्होंने जोर दिया कि साहित्य का मुख्य उद्देश्य समाज को दिशा देना और नए रचनाकारों को सृजन के लिए प्रेरित करना है। समारोह में बलदेव पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रकाश उदय पांडेय को उनकी कृति ‘अरज निहोरा’ के लिए 51,000 रुपए और सम्मान प्रदान किया गया। भोजपुरी शब्दकोश के रचयिता चंद्रशेखर परवाना को व्याकरण सम्मान के तहत 21,000 रुपए की नकद राशि दी गई। इसी अवसर पर तथागत पांडुलिपि प्रकाशन योजना के अंतर्गत चयनित चार पुस्तकों का विमोचन भी राज्यपाल के हाथों हुआ। इनमें ‘ललमुनिया’ और ‘जब नेह का धागा टूटे’ जैसी कृतियां शामिल थीं। संस्था के संरक्षक और पूर्व आईएएस डॉ. एन.पी. सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. सदानंद शाही ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। संचालन डॉ. गोपाल यादव ने किया और बिंदु सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रदीप शुक्ला, डॉ. बलधारी यादव और अरुणेंद्र सिंह सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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