तलाक के बाद बेटी को ढोल-नगाड़ों के साथ घर लाए:पिता बोले- बेटी भी बेटे की तरह परिवार का सदस्य , I Love My Daughter टी-शर्ट पहन किया बेटी का स्वागत
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तलाक के बाद बेटी को ढोल-नगाड़ों के साथ घर लाए:पिता बोले- बेटी भी बेटे की तरह परिवार का सदस्य , I Love My Daughter टी-शर्ट पहन किया बेटी का स्वागत
मेरठ में एक रिटायर्ड जज पिता ने तलाक के बाद अपनी बेटी का ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। बेटी को तलाक के बाद परिवार के लोग ढोल की थाप पर नाचते-गाते नजर आए। मिठाइयां बांटकर खुशी जाहिर की। बेटी के स्वागत में फूल-मालाएं पहनाई गईं। पूरा उत्सव जैसा माहौल बनाया। वहीं इस दौरान परिवार के सभी सदस्य एक जैसी टी-शर्ट पहने हुए थे, जिस पर प्रणिता की तस्वीर के साथ ‘I Love My Daughter’ लिखा हुआ था। हर चेहरे पर बेटी की घर वापसी की खुशी साफ झलक रही थी। पिता ने कहा- अगर मेरी बेटी अपनी शादी में दुखी थी, तो उसे खुशी देना मेरा दायित्व था। मैंने कोई एलीमनी, मेंटेनेंस या सामान नहीं लिया, सिर्फ अपनी बेटी को वापस लाया हूं।
मेरठ के ज्ञानेंद्र शर्मा अपनी बेटी प्रणिता शर्मा को तलाक के बाद पूरे सम्मान के साथ घर वापस लाए है। इस दौरान परिवार के लोग ढोल की थाप पर नाचते-गाते नजर आए और मिठाइयां बांटकर खुशी जाहिर की। बेटी के स्वागत में फूल-मालाएं पहनाई गईं और पूरे माहौल में उत्सव जैसा माहौल दिखा। खास बात यह रही कि परिवार के सभी सदस्य एक जैसी टी-शर्ट पहने हुए थे, जिस पर प्रणिता की तस्वीर के साथ “I Love My Daughter” लिखा हुआ था। हर चेहरे पर बेटी की घर वापसी की खुशी साफ झलक रही थी। ज्ञानेंद्र शर्मा ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि बेटी को भी बेटे की तरह परिवार का समान सदस्य मानना चाहिए। उन्होंने कहा, “समाज में यह सोच रही है कि बेटी की डोली जाती है तो अर्थी ही लौटनी चाहिए। इसमें थोड़ा बदलाव तो आया है, लेकिन असली बदलाव अभी बाकी है। बेटी को हर हाल में ससुराल में रहने के लिए मजबूर करना गलत है।” उन्होंने आगे कहा, अगर मेरी बेटी अपनी शादी में दुखी थी, तो उसे खुशी देना मेरा दायित्व था। मैंने कोई एलीमनी, मेंटेनेंस या सामान नहीं लिया, सिर्फ अपनी बेटी को वापस लाया हूं। पिता ने यह भी कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण की बात सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे जमीन पर उतारना जरूरी है। आगे उन्होंने कहा की मेरी बेटी शादी में बाजे-गाजे के साथ विदा हुई थी, आज तलाक के बाद मैं उसे उसी सम्मान के साथ वापस लाया हूं। वहीं प्रणिता शर्मा ने बताया कि उनकी शादी 14 दिसंबर 2018 को हुई थी और पिछले 7 सालों में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि पति और ससुराल पक्ष की ओर से उन्हें मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्होंने आगे बताया की “मैं कई बार वापस गई, यह सोचकर कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन हालात नहीं बदले। मैं मानसिक रूप से बहुत कमजोर हो चुकी थी, लेकिन मेरा परिवार मेरे साथ खड़ा रहा। प्रणिता ने अन्य महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि अगर वे किसी तरह की प्रताड़ना झेल रही हैं, तो उन्हें अपने लिए खड़ा होना चाहिए। पहले खुद को मजबूत बनाइए, पढ़िए-लिखिए, अपने पैरों पर खड़े होइए, उसके बाद ही शादी के बारे में सोचिए, उन्होंने कहा। उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना ही असली सशक्तिकरण है।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
