बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) में डॉ. के. आर. सुरंगें स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉ. श्रीकृष्ण देशपांडे ने भारत में तेल अन्वेषण की कहानी प्रस्तुत की। उन्होंने देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और नए समाधानों की आवश्यकता पर चर्चा की । कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. महेश जी. ठक्कर के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने वैश्विक ऊर्जा संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए भारत को अपनी ऊर्जा रणनीतियों को मजबूत और टिकाऊ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. ठक्कर ने सतत ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। भारत में तेल खोज के इतिहास को विस्तार से समझाया व्याख्यान ‘द ऑयल हंटर’ में डॉ. देशपांडे ने भारत में तेल खोज के इतिहास को विस्तार से समझाया। उन्होंने असम के डिगबोई तेल क्षेत्र से लेकर बॉम्बे हाई तक की खोज यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार वैज्ञानिकों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य कर देश के ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा दी। डॉ. देशपांडे ने बताया कि भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पेट्रोलियम उपभोक्ता है। हालांकि, घरेलू उत्पादन में उतनी वृद्धि नहीं हुई है, जिसके कारण देश की आयात पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। इससे आर्थिक दबाव में भी वृद्धि हुई है। कचरे से बायोगैस उत्पादन को भी महत्वपूर्ण भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों पर चर्चा करते हुए, उन्होंने सौर, पवन, जल और परमाणु ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोतों के त्वरित विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथही , उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों और कचरे से बायोगैस उत्पादन को भी महत्वपूर्ण बताया।व्याख्यान के समापन पर एक सवाल-जवाब सत्र आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों और शोधार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस सत्र ने युवाओं को ऊर्जा क्षेत्र में नए विचारों और नवाचार के लिए प्रेरित किया।

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