प्रयागराज में मंडलीय अस्पताल में तैनात एक डॉक्टर की सरेआम पिटाई की गई। दिनदहाड़े उन्हें घेरकर बदमाशों ने लात-घूंसे बरसाए। डंडे से भी चोट पहुंचाई। शिकायत के बावजूद डॉक्टर को टरकाया जाता रहा। वह लगातार चक्कर काटते रहे तब जाकर 11 दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई। हालांकि पुलिस का कहना है कि डॉक्टर खुद पहले एफआईआर नहीं दर्ज कराना चाहते थे। एक आरोपी को जेल भेज दिया गया है।
14 मार्च की घटना
पीड़ित डॉक्टर गौरव पांडेय मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के छात्र हैं। उनकी ड्यूटी इन दिनों मोती लाल नेहरू मंडलीय अस्पताल(कॉल्विन) में चल रही है जहां वह तीन महीने के प्रशिक्षण पर हैं। उन्होंने बताया, 14 मार्च को वह ओपीडी खत्म करने के बाद दोपहर में अपने कमरे पर वापस जाने के लिए अस्पताल से निकले। एमडीआई अस्पताल के सामने पानी की बोतल खरीदने के लिए वह एक दुकान पर रुके। लात-घूंसों से पीटा
अभी वह पानी खरीद ही रहे थे कि तभी वहां दो बाइक पर सवार होकर पांच लड़के आए। उनमें से एक युवक ने उन्हें बाहर खींच लिया और गालीगलौज करने लगा। विरोध करने पर अपने साथियों के साथ मिलकर उन्हें पीटना शुरू कर दिया। घेरकर लात-घूंसे बरसाए। साथ ही बाइक भी क्षतिग्रस्त कर दी। वह छोड़ने की गुहार लगाते रहे लेकिन हमलावर उन्हें पीटते रहे। धमकाते हुए भाग निकले
जब राहगीरों की भीड़ जुटने लगी तो हमलावर धमकाते हुए भाग निकले। जाते-जाते धमकी भी दी कि पुलिस में गए तो जान से मार देंगे। उन्होंने इस घटना की सूचना अपने सीनियर डॉक्टरों को दी और इसके बाद उसी दिन शाहगंज थाने में तहरीर दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पानी बेचने वाले समेत आसपास के दुकानदारों से भी पूछताछ की। सीसीटीवी फुटेज भी निकलवाया, जिसमें हमलावर नजर भी आए। डॉक्टर ने उसी दिन तहरीर भी दी। 25 मार्च को रिपोर्ट दर्ज की
डॉक्टर का कहना है कि इसके बाद वह लगातार कार्रवाई की गुहार लगाते रहे। तब जाकर 11 दिन बाद 25 मार्च को रिपोर्ट दर्ज की। थानाध्यक्ष बोले-डॉक्टर नहीं दर्ज कराना चाहते थे मुकदमा
इस मामले में थानाध्यक्ष कपिल कुमार का कहना है कि डॉक्टर को खुद बुलाकर मैंने बात की थी लेकिन वह एफआईआर दर्ज कराने को राजी नहीं थे। बाद में उन्होंने तहरीर दी और फिर मुकदमा दर्ज कर मुनव्वर नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

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