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डॉक्टरों ने 12 साल की बच्ची को दी नई जिंदगी:कानपुर में दिल में टीबी की गांठ, 4 घंटे धड़कन रोककर निकाली पत्थर जैसी झिल्ली

शहर के हृदय रोग संस्थान (एलपीएस कार्डियोलॉजी) के डॉक्टरों ने एक 12 साल की बच्ची का जटिल ऑपरेशन कर उसे नई जिंदगी दी है। फतेहपुर की रहने वाली लक्ष्मी पटेल के दिल के दाहिने हिस्से (राइट एट्रियम) में टीबी की एक विशाल गांठ बन गई थी, जिसने खून के बहाव को लगभग रोक दिया था। संस्थान के विशेषज्ञों का दावा है कि इस तरह का यह दुनिया का पहला मामला है, जिसे अब अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशन के लिए भेजा जाएगा। सांस लेना था मुश्किल, शरीर में आ गई थी सूजन फतेहपुर के खंडदेवर की रहने वाली लक्ष्मी को 24 फरवरी को संस्थान के सीवीटीएस विभाग में भर्ती किया गया था। उस वक्त बच्ची की हालत बेहद गंभीर थी। उसे बैठे-बैठे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और पूरे शरीर के साथ-साथ पैरों में भारी सूजन आ गई थी। जांच करने पर पता चला कि उसके दिल की धड़कन भी असामान्य है और हृदय के आसपास पानी जमा हो गया है। इको जांच में हुआ बड़ा खुलासा डॉक्टरों ने जब लक्ष्मी की टीटीई और टीईई (हृदय की विशेष जांच) की, तो रिपोर्ट देखकर सब हैरान रह गए। दिल के दाहिने हिस्से में 10×10 सेंटीमीटर की एक बड़ी गांठ मौजूद थी। यह गांठ दिल के वाल्व को पूरी तरह ढक चुकी थी, जिससे शरीर में रक्त का संचार बाधित हो रहा था। इसके साथ ही दिल के ऊपर की सुरक्षा झिल्ली (पेरिकार्डियम) भी सामान्य से कहीं ज्यादा मोटी होकर 1 सेंटीमीटर तक पहुंच गई थी। शुरुआत में इसे ट्यूमर माना जा रहा था। हार्ट-लंग मशीन पर रखकर 4 घंटे चला ऑपरेशन
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए 14 मार्च को ऑपरेशन का फैसला लिया गया। डॉ. राकेश वर्मा के निर्देशन में डॉक्टरों की टीम ने बच्ची को हार्ट-लंग मशीन पर लिया और दिल की धड़कन रोककर सर्जरी शुरू की। सबसे पहले दिल के ऊपर जमी मोटी और सख्त झिल्ली को बड़ी धमनियों से बेहद सावधानी से अलग किया गया। इसके बाद दिल की दीवार खोलकर उस विशाल गांठ को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के बाद जब गांठ की बायोप्सी कराई गई, तो पता चला कि वह ट्यूमर नहीं बल्कि टीबी का संक्रमण था। विश्व स्तर पर रिपोर्ट होगा यह दुर्लभ मामला संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि दिल के अंदर टीबी की इतनी बड़ी गांठ और साथ में झिल्ली का इतना मोटा होना बेहद दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेडिकल लिटरेचर खंगालने पर भी दुनिया में अब तक ऐसा कोई दूसरा केस सामने नहीं आया है। यह संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। फिलहाल बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। इन डॉक्टरों की टीम ने किया सफल ऑपरेशन इस जटिल सर्जरी को अंजाम देने वाली टीम में सर्जिकल विभाग से प्रो. राकेश वर्मा, डॉ. सौरभ, डॉ. प्रभात, डॉ. श्रीराज और डॉ. लक्ष्मण शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. चांदनी, डॉ. सूरज, डॉ. उर्वशी, डॉ. निशा और डॉ. दीक्षा ने सहयोग किया। वहीं, हार्ट-लंग मशीन का जिम्मा डॉ. मुबीन ने संभाला और नर्सिंग स्टाफ में सुनीता, वैशाली व अनुज शामिल रहे।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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