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डबल मर्डर केस: पूर्व विधायक छोटे सिंह को झटका:HC ने जमानत अर्जी खारिज की, सजा निलंबन से इनकार


                 डबल मर्डर केस: पूर्व विधायक छोटे सिंह को झटका:HC ने जमानत अर्जी खारिज की, सजा निलंबन से इनकार

डबल मर्डर केस: पूर्व विधायक छोटे सिंह को झटका:HC ने जमानत अर्जी खारिज की, सजा निलंबन से इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जालौन के चर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में दोषी ठहराए गए भाजपा नेता और बसपा के पूर्व विधायक छोटे सिंह को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनकी सजा निलंबन और जमानत अर्जी खारिज कर दी। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए यह फैसला सुनाया। यह आदेश आपराधिक अपील संख्या 8800/2025 में पारित किया गया। अदालत ने 16 मार्च 2026 को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था। जिसे 19 मार्च को सुनाया गया। क्या है मामला…
यह मामला 1994 का है। जब चुर्खी थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े एक घर में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। इस हमले में राजकुमार और जगदीश शरण की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हुआ था। घटना के बाद राम कुमार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ था। जांच के दौरान छोटे सिंह का नाम सामने आया और ट्रायल के बाद 11 सितंबर 2025 को अपर सत्र न्यायाधीश (ईसी एक्ट) जालौन ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 10 साल की सजा सुनाई थी। FIR में नाम न होना अपने आप में निर्णायक नहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में तर्क दिया कि छोटे सिंह का नाम एफआईआर में नहीं था और उन्हें बाद में फंसाया गया। गवाहों के रिश्तेदार होने और मेडिकल साक्ष्यों में हथियारों के अंतर का भी हवाला दिया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी पहले जमानत पर था और उसने कभी उसका दुरुपयोग नहीं किया। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि एफआईआर में नाम न होना अपने आप में निर्णायक नहीं है, खासकर जब घटना भयावह परिस्थितियों में दर्ज हुई हो। कोर्ट ने माना कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की गवाही विश्वसनीय है और केवल रिश्तेदारी के आधार पर उसे खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य आरोपी की संलिप्तता को मजबूत करते हैं। साथ ही आरोपी के आपराधिक इतिहास को भी ध्यान में रखा गया। कोर्ट की अहम टिप्पणी
खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि, “जब किसी आरोपी को ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी ठहरा दिया जाता है, तो उसके पक्ष में निर्दोष होने की धारणा समाप्त हो जाती है। ऐसे में सजा निलंबन के लिए ठोस आधार आवश्यक है। जो इस मामले में नहीं पाया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि आरोपी दोबारा जमानत अर्जी दाखिल करता है, तो वह इस बेंच तक सीमित नहीं होगी और मुख्य न्यायाधीश की अनुमति से किसी अन्य पीठ के समक्ष प्रस्तुत की जा सकती है। फिलहाल छोटे सिंह को उरई जेल में ही रहना होगा। —————————— यह खबर भी पढ़िए- मोदी से मिलकर क्या वरुण को नई जिम्मेदारी मिलेगी: यूपी की सियासत में 2 साल से ‘गायब’; 2024 के बाद पीलीभीत नहीं गए साल 2009- वरुण गांधी राजनीति में आए और पीलीभीत से सांसद बन गए। 2014 में वह सुल्तानपुर सीट से लड़े, पौने दो लाख वोटों से फिर जीत गए। इस चुनाव से ठीक पहले उन्होंने पीलीभीत में एक भाषण दिया था। कहा था- अगर कोई हिंदुओं की तरफ हाथ बढ़ाता है या सोचता है कि हिंदू नेतृत्वविहीन है, तो मैं गीता की कसम खाकर कहता हूं कि उसका हाथ काट डालूंगा। ऐसे बयानों की वजह से वरुण गांधी यूपी में मशहूर होते चले गए। हिंदुत्व का बड़ा चेहरा बन गए। पढ़ें पूरी खबर…


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