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ट्रम्प ने बराक-मिशेल ओबामा का वीडियो डिलीट किया:व्हाइट हाउस बोला- स्टाफ ने गलती से शेयर की; पूर्व राष्ट्रपति, उनकी पत्नी को बंदर दिखाया था

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया से पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा का वीडियो डिलीट कर दिया है। इस वीडियो में ओबामा और उनकी पत्नी को जंगल में प्राइमेट्स (बंदर) के रूप में दिखाया गया था। यह वीडियो गुरुवार रात ट्रम्प के ट्रूथ सोशल अकाउंट पर शेयर किया गया था और शुक्रवार को हटा दिया गया। व्हाइट हाउस ने कहा कि यह पोस्ट एक स्टाफ की गलती से शेयर हुई थी। हालांकि, कुछ घंटे पहले ही व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा था कि पोस्ट में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। इस पोस्ट का काफी विरोध हो रहा था। नागरिक अधिकार संगठनों से लेकर रिपब्लिकन पार्टी के सीनियर नेताओं तक ने इसकी तीखी आलोचना की। विरोध के बाद व्हाइट हाउस ने सफाई दी और कहा कि वीडियो गलत तरीके से पोस्ट हुआ था और इसे हटा दिया गया। वीडियो में 2020 चुनाव को लेकर झूठे दावे भी थे यह वीडियो ट्रम्प के उन कई पोस्ट्स में से एक था, जिनमें उन्होंने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के झूठे दावों को फिर से आगे बढ़ाया। हालांकि, अमेरिका की कई अदालतें और ट्रम्प के पहले कार्यकाल के अटॉर्नी जनरल पहले ही कह चुके हैं कि चुनाव में ऐसी कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी, जिससे नतीजों पर असर पड़ता। वीडियो में क्या था आपत्तिजनक हिस्सा
करीब 62 सेकंड के इस वीडियो का ज्यादातर हिस्सा एक कंजर्वेटिव वीडियो से लिया गया था, जिसमें बैटलग्राउंड राज्यों में वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए हैं। वीडियो के आखिरी हिस्से में कुछ सेकंड के लिए दो प्राइमेट्स दिखाए गए थे, जिन पर बराक और मिशेल ओबामा के चेहरे लगाए गए थे। यह दृश्य एक अलग इंटरनेट मीम वीडियो से लिया गया था, जिसे पहले भी एक प्रभावशाली कंजर्वेटिव मीम मेकर ने फैलाया था। उस वीडियो में ट्रम्प को ‘जंगल का राजा’ और डेमोक्रेट नेताओं को जानवरों के रूप में दिखाया गया था। व्हाइट हाउस का बचाव और पलटी
प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने पहले इसे ‘लायन किंग’ थीम वाला मीम बताया और आलोचना को “फेक आक्रोश” करार दिया। हालांकि, दोपहर तक पोस्ट हटा ली गई और जिम्मेदारी एक ट्रम्प सहयोगी पर डाल दी गई। ब्लैक हिस्ट्री मंथ में विवाद
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका में ब्लैक हिस्ट्री मंथ चल रहा है। कुछ दिन पहले ही ट्रम्प ने एक आधिकारिक घोषणा में अश्वेत अमेरिकियों के योगदान और आज़ादी, न्याय व समानता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की बात कही थी। राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
पोस्ट पर दोनों पार्टियों के नेताओं ने नाराज़गी जताई। नागरिक अधिकार नेता रेव. बर्निस किंग ने कहा कि अश्वेत अमेरिकियों को जानवरों से तुलना करना अस्वीकार्य है। रिपब्लिकन सीनेटर टिम स्कॉट ने इसे व्हाइट हाउस से जुड़ी अब तक की सबसे नस्लवादी चीज़ों में से एक बताया। मिसिसिपी के सीनेटर रोजर विकर ने पोस्ट को “पूरी तरह अस्वीकार्य” कहा और माफी की मांग की। NAACP अध्यक्ष डेरिक जॉनसन ने वीडियो को “खुल्लमखुल्ला नस्लवादी और घृणित” करार दिया। ओबामा की प्रतिक्रिया नहीं
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की प्रवक्ता ने कहा कि ओबामा की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जाएगी। अमेरिका में अश्वेत लोगों को बंदर या जानवरों से जोड़ने की परंपरा का इतिहास काफी पुराना और गहराई से नस्लवादी रहा है। 18वीं सदी से ही ऐसे मिथ्या और छद्म वैज्ञानिक विचारों का इस्तेमाल गुलामी को सही ठहराने और बाद में अश्वेत समुदाय को अमानवीय दिखाने के लिए किया गया। डोनाल्ड ट्रम्प पर पहले भी नस्लीय रूप से भड़काऊ भाषा के इस्तेमाल के आरोप लगते रहे हैं। अपने राजनीतिक करियर में उन्होंने ओबामा की नागरिकता को लेकर झूठे दावे फैलाए थे और कई बार अश्वेत बहुल देशों व समुदायों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है।


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