विश्व टीबी दिवस के अवसर पर जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. विपुल कुमार ने बताया कि टीबी (तपेदिक) एक संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस बैक्टीरिया से होती है और मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। इस वर्ष की थीम “Yes, We Can End TB: Lead by Bharat, Powered by जनभागीदारी ” पर जोर देते हुए उन्होंने जनभागीदारी को टीबी उन्मूलन की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने बताया कि टीबी के प्रमुख लक्षणों में दो हफ्ते या उससे अधिक समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना, भूख न लगना, बलगम में खून आना, छाती में दर्द और शरीर में कमजोरी शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। डॉ. विपुल कुमार के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से अब तक जिले में 3273 टीबी मरीज चिन्हित किए गए हैं, जिनमें 1458 मरीज निजी चिकित्सकों के माध्यम से सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि मरीज के चिन्हित होने के बाद उसे मास्क पहनना चाहिए, खांसते समय मुंह ढकना चाहिए और बलगम का सुरक्षित निस्तारण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा टीबी मरीजों के लिए मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही “निक्षय पोषण योजना” के तहत मरीजों को इलाज के दौरान 1000 रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाती है। निजी मरीजों की देखभाल के लिए पब्लिक-प्राइवेट सपोर्ट एजेंसी भी कार्य कर रही है। डीटीओ ने कहा कि टीबी के इलाज में सबसे जरूरी है कि मरीज पूरा कोर्स नियमित रूप से पूरा करे। इलाज बीच में छोड़ने से बीमारी गंभीर हो सकती है। इसके लिए ट्रीटमेंट सपोर्टर भी नियुक्त किए जाते हैं, जो मरीज की निगरानी और सहायता करते हैं। उन्होंने बताया कि जिले में 100 दिन का विशेष टीबी उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत 20 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग की जा रही है। अब गांवों में हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों के जरिए जांच की जा रही है, जिसमें एआई सॉफ्टवेयर लगा है। यह तकनीक तुरंत बता देती है कि एक्स-रे सामान्य है या असामान्य, जिससे संभावित मरीजों की शुरुआती पहचान आसान हो रही है। डॉ. विपुल कुमार ने कहा कि आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के सहयोग से टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और इलाज पूरा करें, ताकि टीबी को जड़ से खत्म किया जा सके।

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