झांसी में पेट्रोल और डीजल के लिए पिछले दो दिनों से बनी अफरा-तफरी अब काफी हद तक थम गई है। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद पेट्रोल पंपों पर स्थिति सामान्य होने लगी है और शनिवार को शहर में कहीं भी लंबी लाइनें नजर नहीं आईं। लोगों को आसानी से ईंधन मिलने लगा है। दरअसल, पेट्रोल पंपों पर बढ़ती भीड़ और अचानक खत्म हो रहे स्टॉक को देखते हुए प्रशासन ने आपात बैठक कर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए। इसके तहत अब डीजल की बिक्री के लिए मानक तय कर दिए गए हैं। खास तौर पर किसानों के लिए कंटेनर या ड्रम में डीजल लेने की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए पहचान जरूरी कर दी गई है। किसानों के लिए तय किए गए नियम
अब किसानों को डीजल लेने के लिए आधार कार्ड या खेती से जुड़े दस्तावेज दिखाने होंगे।
सामान्य स्थिति में एक किसान को दिन में एक बार 20 लीटर डीजल कंटेनर में दिया जाएगा। यदि किसान खतौनी दिखाता है, तो उसे 40 लीटर तक डीजल मिल सकेगा। इस कदम का मकसद जमाखोरी पर रोक लगाना और वास्तविक जरूरतमंद किसानों तक ईंधन पहुंचाना है। अफवाह के बाद बनी थी स्थिति
ईंधन की कमी की अफवाह फैलने के बाद आम लोगों में घबराहट बढ़ गई थी। लोग जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल भरवाने लगे, जिससे कई पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ उमड़ पड़ी। इसका असर यह हुआ कि कुछ पंपों पर शुक्रवार को महज चार घंटे में ही स्टॉक खत्म हो गया और लंबी कतारें लग गईं। प्रशासन की सख्ती से सुधरे हालात
प्रशासन द्वारा सप्लाई को नियमित करने और बिक्री के नियम तय करने के बाद अब हालात नियंत्रण में हैं। शहर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है और भीड़ भी कम हो गई है। बॉर्डर इलाकों में बढ़ी मांग
झांसी की सीमाएं मध्य प्रदेश के दतिया, ओरछा और शिवपुरी से जुड़ती हैं। इन इलाकों से बड़ी संख्या में किसान झांसी के पेट्रोल पंपों पर डीजल लेने पहुंच रहे हैं, जिससे सामान्य दिनों की तुलना में बिक्री बढ़ गई है। फिलहाल प्रशासन की निगरानी और सख्ती के चलते स्थिति सामान्य बनी हुई है, लेकिन अधिकारियों ने साफ किया है कि जमाखोरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

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