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झांसी जीआरपी ने ट्रेन से पकड़ा फर्जी TTE:गले में भारतीय रेल के रिबन और ID की जगह बैंक कार्ड डालकर वसूल रहा था जुर्माना

झांसी में ट्रेन में फर्जी टीटीई बनकर यात्रियों से वसूली करने वाले युवक को जीआरपी ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी गले में “इंडियन रेलवे” लिखा रिबन डालकर लोगों को गुमराह कर रहा था।
दरअसल, सीतापुर से मुम्बई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली सुपरफास्ट ट्रेन (12108) में भीड़ और टिकट चेकिंग स्टाफ की कमी का फायदा उठाकर आरोपी ट्रेन के स्लीपर कोच S-8 में चढ़ गया। वह स्लीपर कोच में यात्रियों के टिकट चेक करने लगा और उनसे पैसे वसूलने लगा। भरोसा जीतने के लिए उसने गले में रेलवे जैसा रिबन डाल रखा था, लेकिन उसके कार्ड होल्डर में पहचान पत्र की जगह एयरटेल पेमेंट बैंक का प्रीपेड कार्ड लगा था, जिसे वह छिपाकर रखता था।
यात्रियों को उसकी हरकतों पर शक हुआ तो उन्होंने रेलवे और जीआरपी को सूचना दी। ट्रेन जब रात करीब 3:30 बजे झांसी के वीरांगना लक्ष्मीबाई स्टेशन पहुंची, तब जीआरपी ने उसे पकड़ लिया।
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम अंकित तिवारी, निवासी बलिया बताया। उसने कबूल किया कि उसने स्टेशन के बाहर से “इंडियन रेलवे” लिखा रिबन खरीदा था और भीड़ का फायदा उठाकर पैसे कमाने के लिए फर्जी टीटीई बन गया। हालांकि, वह इस दौरान केवल करीब 200 रुपये ही वसूल पाया। जीआरपी ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। रेलवे स्टेशनों के बाहर बिक रहे रिबन
झांसी समेत अधिकांश रेलवे स्टेशनों के बाहर “भारतीय रेल”, “इंडियन रेलवे”, “नॉर्थ सेंट्रल रेलवे” और “NCR” लिखे हुए रिबन खुलेआम बेचे जा रहे हैं। इन रिबन का इस्तेमाल अब ठगी करने वाले लोग भी कर रहे हैं।
आम तौर पर गले में ऐसा रिबन डाले व्यक्ति को देखकर यात्रियों को लगता है कि वह असली रेलकर्मी है। इसी भरोसे का फायदा उठाकर ठग बिना टिकट यात्रियों को डराते हैं और जुर्माने के नाम पर उनसे पैसे वसूल लेते हैं। स्टाफ की कमी के चलते सक्रिय हैं फ्रॉड
झांसी से होकर गुजरने वालीं या यहां से चलने वाली अधिकांश ट्रेनों में टिकट चेकिंग स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। हालात यह हैं कि जिन ट्रेनों में पांच टीटीई होने चाहिए, वहां केवल दो कर्मचारियों से ही काम चलाया जा रहा है।
कम स्टाफ के कारण स्लीपर और जनरल कोच में ठीक से टिकट चेकिंग नहीं हो पाती। खासकर स्लीपर कोच में अत्यधिक भीड़ होने की वजह से टीटीई सभी यात्रियों तक पहुंच ही नहीं पाते। इसी स्थिति का फायदा उठाकर फर्जी टीटीई सक्रिय हो जाते हैं और यात्रियों से अवैध वसूली करने लगते हैं।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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