[current_date format=”l, F j, Y”]

Breaking News
🚀 DNI News: प्रयागराज से लेकर वैश्विक स्तर तक की हर बड़ी खबर, सबसे पहले! 🔥 Big Breaking: [display-posts posts_per_page=”5″ include_excerpt=”false” image_size=”none”] – अभी पढ़ें पूरी खबर हमारी वेबसाइट पर… ✨ DniNews.Live तकनीक और सूचना का आधुनिक संगम। 📢 ताज़ा अपडेट: dninews.live पर जुड़ें रहें सबसे सटीक विश्लेषण के लिए।

ज्वेलरी दुकान से AK-47 की गोलियों की तस्करी:हरियाणा का मास्टरमाइंड कानपुर से बुलेट्स खरीदकर बिहार में भिजवाता था; खरीदने वाली गैंग की तलाश में NIA


                 ज्वेलरी दुकान से AK-47 की गोलियों की तस्करी:हरियाणा का मास्टरमाइंड कानपुर से बुलेट्स खरीदकर बिहार में भिजवाता था; खरीदने वाली गैंग की तलाश में NIA

ज्वेलरी दुकान से AK-47 की गोलियों की तस्करी:हरियाणा का मास्टरमाइंड कानपुर से बुलेट्स खरीदकर बिहार में भिजवाता था; खरीदने वाली गैंग की तलाश में NIA

NIA और बिहार एटीएस ने नालंदा में कार्रवाई करते हुए ज्वेलरी दुकान और गन हाउस की आड़ में चल रहे अंतरराष्ट्रीय कारतूस तस्करी सिंडिकेट का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि शातिर अपराधी सत्येंद्र सिंह सीएसपी केंद्रों के जरिए रुपयों का लेन-देन कर एके-47 जैसे घातक हथियारों की गोलियां सप्लाई कर रहा था। पुलिस ने छापेमारी में डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश जारी है। जांच एजेंसी ने सोमवार को नालंदा जिले में बड़ी छापेमारी की। सुबह 3 बजे शुरू हुई यह कार्रवाई बिहारशरीफ के लहेरी मोहल्ला स्थित ‘पीके गन हाउस’ और ‘रवि ज्वेलरी’ समेत 6 ठिकानों पर चली। करीब 9 घंटे तक चली इस छापेमारी में टीम ने डिजिटल सबूत और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए NIA को रेड में क्या मिला और गैंग किस तरह से काम करती थी… NIA रेड की कुछ तस्वीरें देखिए CSP सेंटर्स से चलता था पूरा खेल NIA ने हिलसा और चिकसौरा के सीएसपी केंद्रों से डिजिटल गैजेट्स और डीवीआर जब्त किए हैं। नेटवर्क की मुख्य कड़ी माना जाने वाला सत्येंद्र सिंह शातिर अपराधी है। वह 2001 और 2009 में भी अवैध हथियारों के साथ पकड़ा जा चुका है। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हथियारों और गोलियों की खरीद-बिक्री के लिए रकम का लेन-देन ‘कस्टमर सर्विस पॉइंट’ (सीएसपी) केंद्रों के जरिए किया जा रहा था। गिरोह का सरगना अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों और सीएसपी संचालक कुंदन के जरिए गिरफ्तार तस्कर मो. परवेज तक पैसे भेजता था। सवाल-जवाब में AK-47 सिंडिकेट का पूरा खेल समझिए
सवाल: एनआईए ने नालंदा के गन हाउस और ज्वेलरी शॉप पर छापा क्यों मारा?
जवाब: जांच में खुलासा हुआ कि इन दुकानों की आड़ में हथियारों की डीलिंग और काली कमाई को खपाने का खेल चल रहा था। सवाल: इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड कौन है और तार कहां से जुड़े हैं?
जवाब: मास्टरमाइंड कुरुक्षेत्र का कालरा परिवार है, जो यूपी के कानपुर से गोलियां खरीदकर बिहार में सप्लाई करता था। सवाल: डिजिटल पेमेंट के लिए सीएसपी केंद्रों का इस्तेमाल क्यों?
जवाब: बड़े बैंक ट्रांजेक्शन से बचने के लिए छोटे सीएसपी केंद्रों और रिश्तेदारों के खातों से ‘डिजिटल हवाला’ के जरिए रकम भेजी जाती थी। सवाल: फरार आरोपी सत्येंद्र की इस सिंडिकेट में क्या भूमिका है?
जवाब: सत्येंद्र इस नेटवर्क की मुख्य कड़ी है, जो 2001 से हथियार तस्करी में शामिल है और इसी के इशारे पर पैसे भेजे जाते थे। सवाल: बरामद कारतूसों की संख्या इतनी डरावनी क्यों है?
जवाब: महज 4 महीने में 2500+ कारतूस मिले हैं, जिनमें एके-47 की गोलियां भी शामिल हैं, जो किसी बड़ी साजिश का संकेत हैं। सवाल: एनआईए अब आगे किस दिशा में जांच कर रही है?
जवाब: जब्त डीवीआर और मोबाइल के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि ये गोलियां किन बड़े अपराधियों या गिरोहों तक जानी थी। हरियाणा से बिहार तक फैला है नेटवर्क यह सिर्फ स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट है। यूपी के कानपुर की लाइसेंसी दुकानों से गोलियां खरीदी जाती हैं और हरियाणा के कुरुक्षेत्र से इसकी फंडिंग और सप्लाई कंट्रोल होती है। पिछले कुछ महीनों में फतुहा और लहेरी से करीब 2500 कारतूस बरामद हो चुके हैं, जिनमें एके-47 की गोलियां भी शामिल थीं। एनआईए अब तक हरियाणा से विजय व कुश कालरा और बिहार से शशि व रविरंजन जैसे बड़े चेहरों को दबोच चुकी है। सीएसपी केंद्र से भेजी जाती थी तस्कर को रकम‎ टीम ने हिलसा और चिकसौरा थाना इलाके में छापेमारी की। बताया जा रहा है कि ‎बिहारशरीफ से गिरफ्तार तस्कर परवेज के मोबाइल में कुछ अहम सुराग मिला था। जिसके ‎आधार पर हिलसा के राममूर्ति नगर और चिकसौरा के मिर्जापुर और बाजार स्थित एक ‎सीएसपी केंद्र में छापेमारी हुई। जांच में खुलासा हुआ कि हथियारों की खरीद-बिक्री के लिए‎डिजिटल पेमेंट सीएसपी केंद्र से भेजा जाता था। केशोचक निवासी सत्येंद्र सिंह नेटवर्क का‎ मुख्य कड़ी था। सीएसपी संचालक कुंदन का नाम भी सामने आया है। सत्येंद्र और कुंदन‎ आपस में रिश्तेदार हैं। एनआईए की पूछताछ में यह सामने आया कि गिरोह के सरगना के‎ इशारे पर कुंदन के माध्यम से मो. परवेज तक पैसे भेजे जाते थे। गिरफ्तारी से बचने के‎लिए सत्येंद्र सिंह ने अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया। हालांकि तकनीकी‎ साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसियों ने इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है।‎ 2 बार हथियार के साथ पकड़ा जा चुका है सत्येन्द्र छापेमारी के दौरान टीम ने हिलसा के‎ राममूर्ति नगर स्थित सत्येंद्र सिंह के‎ निवास और उसके ससुराल मिर्जापुर और‎ चिकसौरा में उसके रिश्तेदार कुंदन के‎सीएसपी केंद्र पर सुबह चार बजे पहुंची‎। घेराबंदी कर पांच घंटे तक छापेमारी‎ की। इस दौरान पलंग, बक्सा, अलमारी‎ तक खंगाले गए। टीम ने सत्येंद्र सिंह का ‎आधार कार्ड और उसकी पत्नी का‎ चेकबुक, मोबाइल जब्त किया। सत्येंद्र ‎सिंह फिलहाल है। पहले कई मामलों में गिरफ्तार हो ‎चुका है। साल 2001 में पटना जिले के सिगरियावा‎ में हथियार के साथ पकड़ा गया था,‎जबकि 2009 में पटना-नालंदा बॉर्डर पर‎चकमहदीपुर गांव के पास भी हथियार के ‎साथ गिरफ्तार हुआ था। परिजनों ने यह भी ‎स्वीकार किया कि वह दो नंबर के धंधे‎ और शराब की लत के कारण अपनी ‎पैतृक जमीन भी बेच चुका है। फिलहाल‎ एनआईए और एटीएस की टीम पूरे ‎नेटवर्क की गहन जांच में जुटी है और‎अन्य संदिग्धों की तलाश में छापेमारी‎ जारी है।‎


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

Puri Khabar Yahan Padhein