मशहूर शायर निसार अहमद का रविवार सुबह जफराबाद स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। सुबह 5:00 बजे हुई उनके निधन की खबर सुनते ही साहित्य जगत और स्थानीय लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। पूर्व अध्यक्ष प्रमोद बरनवाल और समाजसेवी शिवम बरनवाल ने उनके निधन को जफराबाद के लिए ‘एक हस्ती और इल्म का खजाना’ खोने जैसा बताया। उनकी साहित्यिक विरासत को याद करते हुए, लोगों ने उनके लिखे हुए शेरों और किताबों पर चर्चा की। उनका एक मशहूर शेर है: ‘विलादते बादे अजान, शहादते बादे नमाज, बस इतनी देर का झगड़ा है, जिंदगी क्या है।’ उनके पुत्र शाहिद अंसारी ने बताया कि शायर निसार अहमद को रविवार रात 10:00 बजे सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। श्रद्धांजलि देने वालों में डॉ. हैदर रजा आब्दी, कलामुद्दीन अंसारी, जफराबाद के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद बरनवाल और नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि डॉ. सरफराज सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल रहे।

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