जौनपुर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद सार्वजनिक स्थलों से कुत्तों को हटाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो पाई है, जिसके परिणामस्वरूप आए दिन लोग घायल हो रहे हैं। जिला अस्पताल में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, हाईवे और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आई थी और अधिशासी अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, अभी तक किसी भी नगर पालिका परिषद या नगर पंचायत में कुत्तों को पकड़ने की कोई प्रभावी व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है। आवारा कुत्ते आम लोगों के लिए जान का खतरा बन गए हैं। ये अक्सर लोगों को काटकर घायल कर रहे हैं। झुंड में घूमने वाले कुत्तों से बुजुर्गों और छोटे बच्चों को विशेष खतरा रहता है। स्कूल जाते समय बच्चे कई बार इन कुत्तों का शिकार हो जाते हैं, वहीं सुबह की सैर करने वालों के लिए भी जोखिम बना रहता है। पिछले दो वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, कुल 85,218 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए हैं। वर्ष 2024 में 30,043 लोगों को कुत्तों ने काटा, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 55,218 हो गई। कुत्तों के शिकार लोगों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाने के लिए जिला अस्पताल में पिछले दो वर्षों में 61,108 वायल खर्च किए गए हैं। मार्च तक भी सैकड़ों लोगों को एंटी-रेबीज लगाया जा चुका है। जिला अस्पताल में रोजाना 8 से 40-50 लोगों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी बड़ी संख्या में पीड़ित पहुंच रहे हैं। इस संबंध में सीआरओ अजय अम्बष्ट ने बताया कि कुत्तों को पकड़कर रखने के लिए स्थल के चयन में दिक्कत आ रही है। उन्होंने कहा कि सभी ईओ से सुझाव मांगे गए हैं और भूमि चयन का प्रयास किया जा रहा है।

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