बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी की 28 मार्च 2024 की देर रात मौत हो गई थी। मौत से पहले उन्होंने यूपी की बाराबंकी सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में मुख्तार ने बताया था कि बांदा जेल में उनकी जान खतरे में है, नसों में दर्द, हाथ-पैर ठंडे पड़ गए हैं और स्टाफ खाने में स्लो पॉइजन दे रहा है। उन्होंने लिखा कि उन्हें लग रहा है कि किसी भी पल मौत आ सकती है। मुख्तार के परिवार और उनके वकील रणधीर सिंह सुमन का दावा है कि जेल स्टाफ ने साजिश करके मुख्तार की जान ली। वकील ने मौत से पहले की फोटो, कोर्ट में दिए बयान और दस्तावेज़ का हवाला दिया है। उनका कहना है कि मजिस्ट्रियल जांच फर्जी थी, और अब वे सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। जांच और रिपोर्ट 172 दिन चली जांच में मुख्तार की मौत की वजह हार्ट अटैक बताई गई। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया की वजह से दो साल तक जेल में उनके कपड़े, बैरक और पर्सनल सामान सील रखा गया है। बांदा जेल अधीक्षक आलोक कुमार ने बताया, “जांच के लिए बैरक नंबर-16, मुख्तार के कपड़े, किताबें और पर्सनल सामान सील रखा गया है। हमने परिवार को सामान हैंडओवर करने की पेशकश की थी, लेकिन कोई लेने नहीं आया। दो साल बाद भी बैरक उसी कंडीशन में है। यह प्रोटोकॉल केस की इन्वेस्टिगेशन का हिस्सा है।” कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी दो साल बीतने के बाद भी जेल साजिश और मौत के कारणों की कानूनी लड़ाई जारी है। परिवार का कहना है कि सच्चाई सामने आने तक वे कोर्ट में केस लड़ते रहेंगे।

Leave a Reply