रायबरेली में जिलाधिकारी हर्षिता माथुर के सख्त निर्देश पर जनपद की गैस एजेंसियों का औचक निरीक्षण किया गया। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारु बनाना है, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। DM के निर्देश के बाद सभी उप जिलाधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में गैस एजेंसियों की जांच की। निरीक्षण के दौरान एलपीजी वितरण व्यवस्था, स्टॉक की स्थिति और उपभोक्ताओं को मिल रही सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया गया। अधिकारियों ने गैस वितरण में किसी भी अनियमितता को रोकने पर जोर दिया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन उपभोक्ताओं ने पहले बुकिंग की है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराई जाए। “प्रथम आवक-प्रथम पावक” (पहले आओ-पहले पाओ) के सिद्धांत को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए गए हैं, जिससे पक्षपात या कालाबाजारी की कोई गुंजाइश न रहे। गैस एजेंसियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे उपभोक्ताओं की समस्याओं का तत्काल समाधान करें और शिकायतों को लंबित न रखें। यदि किसी भी एजेंसी द्वारा एलपीजी वितरण में गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस सख्ती से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस पहल का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और आम जनता को इसका कितना लाभ मिलता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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