औरैया: प्रमुख जनगणना अधिकारी/जिलाधिकारी डॉ0 इन्द्रमणि त्रिपाठी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित मानस सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इसमें विभिन्न स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को जनगणना-2027 के अंतर्गत स्वगणना के प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। यह देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की आठवीं जनगणना होगी। इसे गांव, शहर और वार्ड स्तर पर प्राथमिक आंकड़ों का सबसे बड़ा और विश्वसनीय स्रोत माना जाता है। जिलाधिकारी ने बताया कि जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में मकान सूचीकरण और मकान गणना का कार्य पूरे उत्तर प्रदेश में 22 मई से 20 जून तक चलेगा। दूसरे चरण में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में पूरे देश में संपन्न होगी। जनगणना-2027 का संचालन डिजिटल माध्यम से किया जाएगा, जिसमें पहली बार नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प दिया गया है। इसके तहत, राज्य में जनगणना का क्षेत्रीय कार्य शुरू होने से 15 दिन पहले, यानी 7 से 21 मई 2026 तक, नागरिक सेल्फ एन्युमरेशन पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी जनगणना स्वयं कर सकेंगे। इस अवसर पर जिला जनगणना अधिकारी/अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0) अविनाश चन्द्र मौर्य ने जनगणना की प्रक्रिया, समय-सीमा और कार्ययोजना पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मकान सूचीकरण और गणना के दौरान प्रगणक द्वारा भवन के उपयोग, निर्माण सामग्री, कमरों की संख्या, स्वामित्व, शौचालय प्रकाश स्रोत, खाना पकाने के ईंधन, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, मुख्य अनाज और फोन, वाहन, टेलीविजन, इंटरनेट जैसी 33 प्रकार की परिसंपत्तियों से संबंधित आंकड़े डिजिटल माध्यम से एकत्र किए जाएंगे। परिवार द्वारा जनगणना के दौरान दी गई सभी सूचनाएं पूर्णतः गोपनीय रखी जाएंगी।

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