मधुबनी के रहिका प्रखंड स्थित जितवारपुर गांव को ‘क्राफ्ट विलेज’ के रूप में विकसित करने की दिशा में शनिवार को बड़ा कदम उठाया गया। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने परियोजना का विधिवत कार्यारंभ करते हुए बताया कि केंद्र सरकार से इसके लिए कुल 9 करोड़ 2 हजार 470 रुपये की स्वीकृति मिली है। यह परियोजना वस्त्र मंत्रालय और बिहार संग्रहालय, पटना के सहयोग से संचालित की जाएगी। 20% राशि बिहार डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन करेगा खर्च मंत्री ने बताया कि कुल लागत का 80 प्रतिशत व्यय वस्त्र मंत्रालय द्वारा वहन किया जाएगा, जबकि शेष 20 प्रतिशत राशि बिहार डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन खर्च करेगा। परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी बिहार संग्रहालय प्रबंधन को सौंपी गई है। उल्लेखनीय है कि वस्त्र मंत्रालय किसी भी राज्य में शिल्पग्राम के विकास के लिए अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान करता है, जिसमें राज्य सरकार या संबंधित एजेंसी को 20 प्रतिशत अंशदान देना अनिवार्य होता है। देखें,‘क्राफ्ट विलेज’ की तस्वीरें… पहले चरण में आधुनिक गेस्ट हाउस बनाया जाएगा परियोजना के प्रथम चरण में गांव के डाकबंगला परिसर के समीप कॉमन फैसिलिटी सेंटर से सटे भवन में चार कमरों का आधुनिक गेस्ट हाउस बनाया जाएगा। प्रत्येक कमरे में उच्च स्तरीय सुविधाओं के साथ अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था होगी। इसके अतिरिक्त एक पृथक शौचालय ब्लॉक का भी निर्माण किया जाएगा। परियोजना के तहत 12 आकर्षक स्टॉल तैयार किए जाएंगे, जिनमें मधुबनी पेंटिंग, गोदना पेंटिंग, पेपरमेशी, सुजनी कला और टेराकोटा जैसी पारंपरिक लोककलाओं का प्रदर्शन और विपणन किया जाएगा। डाकबंगला परिसर की खाली भूमि का सौंदर्यीकरण कर पक्कीकरण किया जाएगा तथा स्टॉलों के आसपास बागवानी की भी योजना है। गांव की बदलेगी सूरत,तालाबों के किनारे लगेंगी रंगीन ईंटें जितवारपुर में प्रवेश से पहले एक भव्य मुख्य द्वार का निर्माण होगा, जिसे आकर्षक मधुबनी पेंटिंग से सजाया जाएगा, ताकि दूर से ही शिल्पग्राम की पहचान बन सके। गांव के तीन सरकारी तालाबों का जीर्णोद्धार कर उनके चारों ओर वृक्षारोपण किया जाएगा। तालाबों के किनारों को रंगीन ईंटों और पत्थरों से सजाया जाएगा। सड़कें होंगी पक्की, लगाई जाएंगी 100 स्ट्रीट लाइटें इसके साथ ही गांव की सड़कों का पक्कीकरण किया जाएगा और लगभग 100 स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। गांव के सभी घरों की बाहरी दीवारों को पहले सफेद रंग से पोता जाएगा, जिसके बाद स्थानीय कलाकार अपनी दीवारों पर मधुबनी पेंटिंग उकेरेंगे, जिससे पूरा गांव एक जीवंत कला-दीर्घा के रूप में नजर आएगा। परियोजना के तहत सभी निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों को एक वर्ष के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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