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जाली नोट मामले में दो दोषियों को कैद:25 साल पुराने केस में 7 साल की सजा, 10-10 हजार का जुर्माना भी लगाया

औरैया: सदर कोतवाली क्षेत्र के लगभग 25 वर्ष पुराने फर्जी और जाली नोटों से संबंधित एक मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया है। अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम अतीक उद्दीन ने दो दोषियों को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों की पहचान द्वारिका प्रसाद मिश्रा निवासी बादलगंज, घूरपुर, इलाहाबाद और सुघर सिंह निवासी मल्हौसी, थाना भरथना, जिला इटावा के रूप में हुई है। न्यायालय ने दोनों पर दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर उन्हें छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता चंद्रभूषण तिवारी ने बताया कि यह मामला 15 अक्टूबर 1999 का है। उस दिन कोतवाली पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि मंडी समिति औरैया के सामने दीपू शुक्ला की दुकान पर तीन व्यक्ति सौ रुपये के जाली नोट चलाकर राशन खरीद रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापा मारा और तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। उनके पास से 100 रुपये के जाली नोट बरामद हुए। इस संबंध में द्वारिका प्रसाद मिश्र, हरिओम दुबे और सुघर सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना पूरी कर तीनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। मुकदमे का विचारण अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में हुआ। विचारण के दौरान एक आरोपी हरिओम की मृत्यु हो गई थी। अभियोजन पक्ष ने देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले इस कृत्य के लिए दोषियों को कठोर दंड देने की बहस की, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपियों को गरीब और बीमार मजदूर बताते हुए रहम की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एडीजे अतीक उद्दीन ने यह फैसला सुनाया। दोषियों को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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