जमुई के सिमुलतला थाना क्षेत्र के टेलवा बाजार में 8 दिसंबर 25 की सुबह हुई डकैती अब सिर्फ लूट की घटना नहीं रह गई है। जैसे-जैसे परतें खुल रही हैं, वैसे-वैसे यह मामला गलत तरीके से पैसे का काम, अंदरूनी साजिश और भरोसे के दुरुपयोग की कहानी बनता जा रहा है। पुलिस वर्दी पहनकर आए अपराधियों ने न केवल कानून की साख पर सवाल खड़े किए, बल्कि उस ‘गुप्त कारोबार’ का भी पर्दाफाश कर दिया, जो वर्षों से चुपचाप फल-फूल रहा था। घटना के दिन सुबह करीब 6:30 बजे एक सफेद स्कॉर्पियो टेलवा बाजार स्थित शिक्षक संजीव गुप्ता के घर रुकी। खुद को चकाई पुलिस बताने वाले छह लोग पुलिस वर्दी में थे और हाथ में सर्च वारंट। कानून के नाम पर इतना रौब कि परिवार को शक करने का मौका तक नहीं मिला। तलाशी के दौरान डकैत सीधे उसी अलमारी तक पहुंचे, जहां 20–25 लाख रुपए के जेवर रखे थे। जेवर समेटे, थाने बुलाने की धमकी दी और फरार हो गए। शिक्षक के घर पहुंचे दर्जनों लोग कहानी में असली मोड़ तब आया जब रविवार को चंद्रमंडी इलाके के विराजपुर से स्वर्ण व्यवसायी मनोज पोद्दार और अनिल उर्फ मन्नू दर्जनों लोगों के साथ शिक्षक के घर पहुंच गए। उनका दावा है कि लुटा हुआ सोना शिक्षक का नहीं, बल्कि ग्राहकों का था, जिसे गिरवी के तौर पर यहां रखा गया था। यहीं से डकैती की फाइल पैसे की खेल में बदल गई। संजीव गुप्ता ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उनकी पत्नी लेनदेन करती थी, लेकिन डकैतों को यह सटीक जानकारी कैसे थी कि सोना कहां रखा है। उनका सीधा इशारा उन्हीं स्वर्ण व्यवसायियों पर है, जिनका घर में आना-जाना था।शिक्षक ने आशंका जताई कि मुखबिरी और साजिश में अपने ही शामिल हो सकते हैं। पुराने रंजिश की आशंका सिमुलतला थाना कांड संख्या 104/25 जो सिर्फ डकैती की जांच नहीं कर रहा। एक ओर पुलिस की वर्दी पहनकर अपराध करने वालों को पकड़ना है, तो दूसरी ओर सूद-ब्याज और गिरवी के कथित अवैध नेटवर्क का भी पर्दाफाश करना है।सीसीटीवी फुटेज, टावर डंप और स्थानीय लिंक खंगाले जा रहे हैं। इधर इलाके में चर्चा हो रही है कि यह सुनियोजित डकैती थी, या फिर पुराने हिसाब-किताब चुकाने की साजिश। इस पूरे मामले पर जब सिमुलतला की प्रभारी थानाध्यक्षा नीलम कुमारी ने बताया कि उन्हें इस संदर्भ में कोई जानकारी नहीं है।
https://ift.tt/ulR6VUf
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply