कानपुर मेट्रो ने सोमवार को जमीन के नीचे एक ऐसी ‘जंग’ जीत ली है, जिसका शहरवासी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। कॉरिडोर-2 (CSA से बर्रा-8) के अंडरग्राउंड सेक्शन में टनल बनाने का काम आज पूरी तरह से फिनिश हो गया। टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) ‘पार्वती’ ने जैसे ही डबल पुलिया स्टेशन पर आखिरी दीवार को भेदकर अपना सिर बाहर निकाला, वैसे ही समूचे कॉरिडोर-1 और 2 के सुरंग निर्माण का इतिहास पूरा हो गया। हैरानी की बात यह है कि इस मुश्किल लक्ष्य को महज 16 महीने के भीतर हासिल कर लिया गया। रावतपुर से काकादेव होते हुए डबल पुलिया तक का रास्ता जमीन के नीचे से साफ हो चुका है। 7 ‘योद्धा’ मशीनों ने खोदी शहर की किस्मत की सुरंग कानपुर के 32.5 किमी लंबे मेट्रो नेटवर्क में करीब 13.50 किमी का हिस्सा जमीन के नीचे है। इस भारी-भरकम काम को अंजाम देने के लिए कुल 7 टीबीएम मशीनों ने मोर्चा संभाला था। आजाद और तात्या का पराक्रम: कॉरिडोर-1 में नाना, तात्या, आजाद और विद्यार्थी जैसी मशीनों ने शहर के क्रांतिकारियों के नाम पर सुरंगें खोदीं। नदियों के नाम पर कॉरिडोर-2: यहाँ गोमती, सरस्वती और पार्वती मशीनों का इस्तेमाल हुआ। गोमती ने फरवरी में ही अपना काम पूरा कर लिया था, और आज पार्वती ने अंतिम ब्रेकथ्रू कर इस मिशन को मुकाम तक पहुंचा दिया। बिना जाम लगाए जमीन के नीचे हुआ ‘साइलेंट ऑपरेशन’ यूपीएमआरसी के एमडी सुशील कुमार ने बताया कि यह काम किसी चुनौती से कम नहीं था। शहर के सबसे व्यस्त रूट (रावतपुर-काकादेव-डबल पुलिया) के नीचे सुरंग बनाई गई, लेकिन ऊपर का ट्रैफिक जरा भी प्रभावित नहीं हुआ। अत्याधुनिक तकनीक की मदद से रिहायशी इलाकों के नीचे सुरक्षित टनलिंग पूरी करना टीम के लिए एक बड़ी जीत है। अब सिविल कंस्ट्रक्शन का काम और तेजी से आगे बढ़ेगा। अब क्या होगा आगे?
वर्तमान में आईआईटी से कानपुर सेंट्रल तक मेट्रो दौड़ रही है। अब टनलिंग पूरी होने के बाद कॉरिडोर-2 के स्टेशनों की फिनिशिंग और ट्रैक बिछाने के काम में रफ्तार आएगी। सेंट्रल से नौबस्ता वाले हिस्से पर पहले ही टेस्टिंग चल रही है। यानी वह दिन दूर नहीं जब कानपुर के एक कोने से दूसरे कोने तक का सफर बिना किसी जाम के चंद मिनटों में पूरा होगा।

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