‘कैंसर का मरीज हूं। शरीर कमजोर पड़ गया है। जमीन के पेपर ठीक कराने के लिए ऑफिस के चक्कर लगा रहा हूं। 25 हजार रुपए मांगे थे, 5 हजार ले लिए, लेकिन काम नहीं किया।’ इतना कहते-कहते रामानंद मिश्रा रुक जाते हैं। हाथ में लिए पेपर दिखाने लगते हैं। ऐसी परेशानी सिर्फ रामानंद की नहीं। बिहार में जमीन से जुड़े लाखों मामले पेंडिंग हैं। किसी के नाम में गड़बड़ी है तो किसी का जमाबंदी में नाम दर्ज नहीं हो रहा है। कोई जमीन के दाखिल-खारिज नहीं होने से परेशान है। हाल में डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों से कहा कि जमीन के मामले में कोताही बर्दाश्त नहीं करेंगे। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए, जमीन के पेपर को लेकर लोग कैसे परेशान हो रहे हैं? विजय सिन्हा को एक्शन क्यों लेना पड़ रहा है? भास्कर रिपोर्टर ने बिहार के खगड़िया, पश्चिम चंपारण, कटिहार, सीवान और रोहतास जिले में सैकड़ों लोगों से बात की। कमोबेश सबकी एक ही समस्या मिली, जमीन के कागज सही करने के लिए ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं।पढ़िए 5 जिलों से रिपोर्ट, किस तरह परेशान हो रहे लोग 25 हजार रुपए मांग रहे कर्मचारी, 5 हजार लेकर भी काम नहीं किया जमीन के मामले में लोगों को किस तरह की परेशानी होती है? अधिकारी किस तरह परेशान करते हैं? यह समझने के लिए हम सबसे पहले खगड़िया पहुंचे। हमें खगड़िया अंचल कार्यालय के सामने गोविंदपुर के रामानंद मिश्रा मिले। हाथों में जमीन के कागज लिए। कैंसर से जूझ रहे हैं। शरीर कमजोर पड़ गया है, लेकिन जमीन के परिमार्जन (सुधार) के लिए एक साल से खगड़िया अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। रामानंद मिश्रा ने कहा, ‘जमीन के परिमार्जन के लिए एक साल से ऑफिस के चक्कर लगा रहा हूं। कर्मचारी सुनील कुमार बार-बार ऑफिस बुलाते हैं, लेकिन काम नहीं करते। 25 हजार रुपए मांग रहे थे, अलग-अलग तरीके से 5 हजार रुपए ले लिया, लेकिन अभी तक काम नहीं किया।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे रोज बुलाते हैं, बिना काम किए वापस भेज देते हैं। इसकी शिकायत सीओ से की, लेकिन पता चला कि सीओ भी पैसा लेते हैं। इसके पहले जो सीओ थी वह तो बिना पैसा लिए बात नहीं करती थी।’ यहीं हमारी मुलाकात कमलेश मिश्रा से हुई। उन्होंने कहा, ‘मेरी पुश्तैनी जमीन है। बंटवारे के बाद नाम चेंज कराना है, लेकिन कर्मचारी नहीं कर रहे हैं। एक साल से परेशान हूं। कर्मचारी ने 30 हजार रुपए मांगे। पहले तो मैंने नहीं दिया तब कर्मचारी मुझे और दौड़ाने लगे।’ कमलेश मिश्रा ने कहा, ‘एक दलाल ने मुझसे कहा कि ऐसे रोज दौड़ने से काम नहीं होगा। पैसे दो, एक दिन में काम हो जाएगा। मैं इतना परेशान हो गया था कि सोचा पैसे दे देता हूं। कम से कम काम तो हो जाए। पैसा देने के बाद भी मुझे दौड़ा रहे हैं। कभी कर्मचारी मिलते नहीं, कमी मिल जाते हैं तो कोई न कोई बहाना बना देते हैं। एक साल हो गया, लेकिन अभी तक मेरा काम नहीं हुआ है।’ राजाराम मिश्र भी जमीन के पेपर से जुड़े काम से आए थे। उन्होंने कहा, ‘यहां की सीओ मोना कुमारी ने जमीन के पेपर ठीक कराने के लिए मुझसे 5 बार ऑनलाइन आवेदन कराया। जो पेपर मांगे, मैंने दिए, लेकिन काम नहीं हुआ। मैंने CO की शिकायत ADM से की। उन्होंने CO से जल्दी परिमार्जन करने के लिए कहा, इसके बाद भी सीओ ने नहीं किया।’ राजाराम ने कहा, ‘मुझे रोज-रोज ऑफिस बुलाती थी। कभी कोई कागज तो कभी कोई कागज मांगती रही। मैंने सब कुछ उनको दे दिया। वह अपने हाथ में कागज लेकर देख लेती और फिर बोलती कि अगले दिन आइए। ऐसे ही मैं दौड़ता रहा। अब दूसरे सीओ आए हैं, यह भी ऐसे ही दौड़ाते हैं।’ बगहा: 20 हजार मांगे, मजदूर हूं, कहां से लाऊं आगे हमने पश्चिम चंपारण जिला के लोगों से बात की। यहां भी शिकायत मिली कि अंचल कार्यालय में जानबूझकर काम पेंडिंग रखा जाता है। पहले कागज पूरे नहीं होने के नाम पर दौड़ाया जाता है, फिर पैसे की मांग की जाती है। हम बगहा अंचल कार्यालय पहुंचे। यहां नरेश बिंद से मिले। उन्होंने कहा, ‘मेरी जमीन पर दूसरे व्यक्ति ने कब्जा कर लिया है। जमीन की मापी के लिए कई साल से अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहा हूं। कोई अधिकारी मेरी बात नहीं सुनते।’ नरेश बिंद ने कहा, ‘यहां के सीओ राजू रंजन श्रीवास्तव थे। उस समय उनके ऑफिस में काम करने वाले एक युवक ने कहा कि जमीन की मापी के लिए 20 हजार रुपए लगेंगे। पैसे दो तो तुरंत मापी हो जाएगी। मजदूर हूं, इतने पैसे कहां से लाऊं।’ सीवान: पैसे लिए बिना कोई कागज आगे नहीं बढ़ाते अधिकारी हमने सीवान जिले के लोगों से बात की। नवलपुर गांव के धर्मजीत ने कहा, ‘2014 से मेरी एक जमीन को लेकर मामला चल रहा है। विरोधियों ने इस जमीन के फर्जी पेपर बनवा लिए हैं। CO ने सही से इसकी जांच नहीं की। इसको लेकर मैं अंचल ऑफिस के चक्कर काटता रहा, लेकिन काम नहीं हुआ।’ उन्होंने कहा, ‘बाद में यह मामला कोर्ट में पहुंचा। जो काम अंचल से हो जाता उसके लिए कोर्ट में जाना पड़ा। अब कोर्ट के चक्कर लगा रहा हूं। अंचल अधिकारियों की वजह से मेरी जमीन पर दूसरे लोगों ने कब्जा कर लिया है।’ सिकंदरपुर के रहने वाले धीरज पटेल ने कहा, ‘अंचल के अधिकारी एक भी कागज बिना पैसे लिए आगे नहीं बढ़ाते हैं। मेरी जमीन है। मेरे पिता-दादा उसकी रसीद कटाते रहे हैं। अंचल के अधिकारी ने उस जमीन को रोक सूची में डाल दिया है। मेरे दादाजी के नाम से रसीद कटता है।’ उन्होंने कहा, ‘इसको लेकर कहा गया कि डीएम को आवेदन देने के बाद ठीक कर दिया जाएगा। डीएम को 2 साल पहले आवेदन दिया, लेकिन अभी तक उसे सही नहीं किया गया है। इसी तरह 3 कट्ठा जमीन है, जिसकी रसीद मेरे नाम से कटती है। उस जमीन को भी रोक सूची में डाल दिया गया है।’ धीरज ने आरोप लगाया, ‘अधिकारी हर काम के लिए पैसे मांगते हैं। पैसे लेकर भी काम नहीं करते हैं। मुझसे भी यही बात कही गई कि पैसे दो, जल्द काम हो जाएगा, लेकिन आज तक मेरा काम नहीं हुआ।’ हमने एक कॉलेज में पढ़ाने वाले आलोक कुमार से बात की। उन्होंने कहा, ‘मैं एक कॉलेज बनवा रहा था। वहां 100 साल से सरकारी रास्ता था। एक व्यक्ति ने उस रास्ते को काटकर अपने खेत में मिला लिया। इसकी शिकायत मैने अंचल अधिकारी से की, लेकिन उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया।’ उन्होंने कहा, ‘ऐसा ही एक मामला है कि मेरे एक खेत का दाखिल खारिज बेवजह रिजेक्ट कर दिया गया। इसको लेकर DCLR बार-बार बुलाते हैं। जब उनके ऑफिस जाता हूं तो वह खुद गायब रहते हैं।’ सासाराम: पैसे के चलते दाखिल-खारिज रिजेक्ट किया हमने रोहतास जिला के सासाराम में ऐसे लोगों से बात की जो जमीन के पेपर को लेकर कई साल से परेशान हैं। विशुनपुरा के अंकित ने कहा, ‘मैंने दाखिल खारिज के लिए अप्लाई किया तो ऑनलाइन दिखाया गया कि राजकुमार नाम के एक व्यक्ति ने आपत्ति की है। मैं राजकुमार से मिला। पूछा कि क्या आपत्ति है तो उन्होंने बताया कि मैंने कोई आपत्ति नहीं जताई है। उन्होंने आवेदन भी दिया कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद भी मेरा काम नहीं हो रहा है। ऑफिस में काम करने वाले एक लड़के ने मुझसे कहा कि पैसे दो अभी काम करा देता हूं।’ उन्होंने कहा, ‘जब भी इसकी शिकायत सीओ से करता हूं, वह कहते हैं कि प्रभात से बात कर लो। वह उनके ऑफिस में काम करने वाला लड़का है। मैं जब उससे मिलता हूं तो वह पैसे की मांग करता है। पैसे की वजह से मेरा दाखिल खारिज रिजेक्ट किया गया है।’ कटिहार: पैसे वसूलने के लिए अधिकारी अटकाते हैं काम जमीन से जुड़े पेपर को लेकर हो रही परेशानी के मुद्दे पर हमने कटिहार जिले के लोगों से बात की। यहां के लोगों ने बताया कि अधिकारी जानबूझकर परेशान करते हैं। अधिकारी चाहते हैं कि काम अटका रहे ताकि लोगों से पैसे वसूला जा सके। कटिहार अंचल कार्यालय के पास अपनी समस्या लेकर पहुंचे शाहिद ने कहा, ‘मेरी जमीन पर दूसरे व्यक्ति ने कब्जा कर लिया है। थाना गया तो पुलिस अधिकारी ने कहा कि सीओ से मिलो। सीओ से मिला, अपने सभी पेपर दिखाए। इसके बाद भी उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। जमीन मेरे दादा के नाम पर है। उसकी रसीद हम कटाते रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘दूसरे व्यक्ति ने फर्जी कागज के बल पर उस जमीन पर कब्जा कर लिया है। सीओ से मिलता हूं तो वह ऑफिस के एक आदमी से मिलने को बोलते है। वह आदमी पैसे मांगता है।’
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