उन्नाव में शिया मुस्लिम समुदाय ने मदीना स्थित ऐतिहासिक जन्नतुल बकी कब्रिस्तान की मजारों के पुनर्निर्माण की मांग की है। समुदाय के लोगों ने इस संबंध में भारत सरकार को एक ज्ञापन सौंपा और सऊदी अरब सरकार द्वारा मजारों को ध्वस्त किए जाने को धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की। शिया समुदाय के अनुसार, जन्नतुल बकी में पैगम्बर हजरत मोहम्मद (स.अ.) के परिवारजनों, विशेष रूप से हजरत फातिमा जहरा (अ.स.) और उनके वंशजों की मजारें थीं। इन्हें लगभग 92 वर्ष पूर्व 1926 में सऊदी अरब के तत्कालीन शासक ने ध्वस्त कर दिया था। इस घटना के बाद से दुनियाभर के शिया मुसलमानों में आक्रोश है और वे हर वर्ष इस दिन को विरोध दिवस के रूप में मनाते हैं। समुदाय के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह मामला केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इतिहास, विरासत और करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। इसी क्रम में इस वर्ष भी उन्नाव के शिया समुदाय ने एकजुट होकर ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाया। ज्ञापन सौंपते समय वक्ताओं ने कहा कि जन्नतुल बकी की पवित्र मजारें शिया मुसलमानों की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रही हैं। उन्होंने बताया कि लगभग एक सदी से समुदाय शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज करा रहा है और अपनी आवाज उठाता रहेगा। वक्ताओं ने भारत सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाए। उनका आग्रह है कि भारत सरकार सऊदी अरब सरकार तक भारतीय शिया समुदाय की भावनाएं पहुंचाए और मजारों के पुनर्निर्माण के लिए सकारात्मक पहल करे। एक वक्ता ने यह भी बताया कि हर वर्ष समुदाय की ओर से केंद्र सरकार को ज्ञापन देकर यह गुजारिश की जाती है कि वह उनके संदेश को संबंधित देश तक पहुंचाए, ताकि पैगम्बर साहब की बेटी और उनके परिवारजनों के रौजों का पुनर्निर्माण संभव हो सके। इस अवसर पर मौलाना रज़ा अब्बास, मौलाना आबिद अब्बास, ज़हीर अब्बास नकवी, मुर्तजा हुसैन, तजाहिर हुसैन सहित बड़ी संख्या में समुदाय के लोग उपस्थित थे।

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