जनजातीय ज्ञान संरक्षण पर जोर देगा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय:वाराणसी में कुलपति की मौजूदगी में बैठक, जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ समझौता
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जनजातीय ज्ञान संरक्षण पर जोर देगा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय:वाराणसी में कुलपति की मौजूदगी में बैठक, जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ समझौता
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में रविवार को विद्या परिषद की बैठक हुई। बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षिक, अनुसंधानात्मक एवं सांस्कृतिक उन्नयन से जुड़े प्रमुख प्रस्तावों पर गहन विचार-विमर्श करते हुए उन्हें समेकित रूप में स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक का प्रमुख आधार भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय (भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय) के साथ प्रस्तावित संयुक्त समझौता ज्ञापन रहा। इस संबंध मंत्रालय के प्रस्ताव पर विद्या परिषद् ने अपनी सहमति एवं स्वीकृति प्रदान की। यह निर्णय लिया गया कि इस प्रस्ताव के आधार पर शीघ्र ही विधिवत् प्रक्रिया के अनुसार समझौता संपन्न किया जाएगा। इस समझौते का उद्देश्य जनजातीय समुदायों की समृद्ध ज्ञान परंपराओं, भाषाओं, लोककलाओं, पारंपरिक जीवन-पद्धति एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, पुनर्जीवन और शैक्षिक संस्थानीकरण करना है। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा उपाधि-पत्र एवं प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जिनसे ज्ञान संरक्षण के साथ-साथ कौशल विकास, आत्मनिर्भरता एवं आजीविका संवर्धन को भी प्रोत्साहन प्राप्त होगा। इसी क्रम में यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा आईयूसीटीई (अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र) जो कि स्वायत संस्था है इसके शैक्षणिक एवं शोध समझौते प्रस्ताव को भी विद्या परिषद् ने अनुमोदित किया। यह स्पष्ट किया गया कि आईयूसीटीई एक स्वायत्त संस्था है इसके साथ अध्यापक शिक्षा, शोध, पाठ्यक्रम निर्माण एवं मूल्यांकन प्रणाली में स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय मानकों के अनुरूप कार्य करेगा। इस केन्द्र को विद्या-वाचस्पति कार्यक्रमों के संचालन, शोध की गुणवत्ता संवर्धन तथा बहुविषयक शैक्षिक संवाद को प्रोत्साहन प्राप्त होगा। कुलपति बोले, अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में नवीन आयाम कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा, विश्वविद्यालय का ध्येय भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण के साथ-साथ उसे समकालीन शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ प्रस्तावित समझौता प्रस्ताव हमारी सांस्कृतिक विविधता को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जबकि यूजीसी के द्वारा संचालित अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, वाराणसी से करार से अध्यापक शिक्षा एवं अनुसंधान में उत्कृष्टता, नवाचार और गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी। यह दोनों पहल मिलकर विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करेंगी। बैठक में यह रहे उपस्थित कुलसचिव राकेश कुमार, परीक्षा नियंत्रक दिनेश कुमार, प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल, प्रो. विधु द्विवेदी, प्रो. शैलेश कुमार मिश्र, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. महेन्द्र पांडेय, प्रो. अमित कुमार शुक्ल एवं प्रो. विशाखा शुक्ला, डॉ दिव्य चेतन ब्रह्मचारी, पीआरओ शशींद्र मिश्रा व अन्य रहे।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
