छात्रा की तबियत बिगड़ी, नहीं हुआ बयान:न्यूरोसर्जन पर छेड़छाड़ केस, मजिस्ट्रेट के सामने होनी है पीड़िता से पूछताछ
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छात्रा की तबियत बिगड़ी, नहीं हुआ बयान:न्यूरोसर्जन पर छेड़छाड़ केस, मजिस्ट्रेट के सामने होनी है पीड़िता से पूछताछ
प्रयागराज में न्यूरोसर्जन डॉ. कार्तिकेय शर्मा पर छेड़छाड़ के मामले में फिलहाल छात्रा का मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान नहीं हो सका। उसकी तबियत ठीक नहीं होने के कारण ऐसा हुआ। ऐसे में यह कार्रवाई फिलहाल पूरी नहीं हो सकी। पुलिस छात्रा के स्वस्थ होने का इंतजार कर रही है ताकि बयान दर्ज कराकर मामले में आगे की कार्रवाई की जा सके।
बुखार से है पीड़ित
पुलिस सू्त्रों के मुताबिक, छात्रा से संपर्क किया गया लेकिन पता चला कि उसे बुखार है। ऐसे में वह फिलहाल कहीं आ जा नहीं सकती। हालांकि उसने यह कहा है कि जैसे ही वह स्वस्थ होती है, बयान के लिए उपलब्ध होगी। उधर पुलिस की जांच जारी है। छात्रा की ओर से पुलिस को दिए गए बयान और सीसीटीवी फुटेज का मिलान किया जा रहा है। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जो आरोप लगाए गए हैं, वह घटनास्थल की उस समय की स्थितियों से मैच होते हैं या नहीं।
पुलिस ने शनिवार को लिया था बयान
संभावना थी कि सोमवार को मजिस्ट्रेट के समक्ष उसका बयान दर्ज किया जा सकता है। दरअसल सिविल लाइंस पुलिस ने शनिवार को छात्रा का बयान दर्ज किया था। पुलिस ने महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में छात्रा का वीडियो रिकॉर्डेड बयान लिया था। पूछताछ में छात्रा ने बताया कि वह धूमनगंज क्षेत्र में अपनी मां और भाई के साथ रहती है और उसके पिता का करीब एक वर्ष पहले निधन हो चुका है। उसने कहा कि सिर दर्द की समस्या बढ़ने पर वह एक अप्रैल की रात डॉक्टर को दिखाने उनके क्लाइव रोड स्थित आवास पर गई थी।
यह है पूरा मामला
छात्रा के अनुसार उसका नंबर 74 था और नंबर आने में समय था, ऐसे में जरूरी काम की वजह से उसका भाई कुछ देर में आने की बात कहकर वहां से चला गया था। रात करीब 10:30 बजे नंबर आने पर वह चेंबर में गई। उस समय अन्य मरीज भी मौजूद थे, लेकिन डॉक्टर ने सभी को बाहर भेज दिया और इसके बाद चेंबर के दोनों दरवाजे भीतर से बंद कर दिए। छात्रा ने कहा कि इसके बाद वही घटना हुई, जिसका जिक्र उसने अपनी लिखित तहरीर में किया है।
अन्य साक्ष्यों को भी जुटाया जा रहा
जांच के समानांतर पुलिस अन्य साक्ष्यों को भी एकत्र कर रही है। डॉक्टर के आवास और चेंबर के बाहर के सीसीटीवी फुटेज कब्जे में लिए जा चुके हैं और उनके आधार पर आवाजाही व समय का मिलान किया जा रहा है। फोन कॉल डिटेल के जरिए घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
इसके अलावा घटना के समय मौजूद स्टाफ, मरीजों और उनके तीमारदारों से पूछताछ की जा रही है। ओपीडी पेशेंट रजिस्टर और डीवीआर को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है, जिससे टाइमलाइन और उपस्थिति से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सके। पुलिस अफसरों ने बताया कि फिलहाल छात्रा के स्वस्थ न होने के चलते उसका बयान नहीं दर्ज कराया जा सका है।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
