जौनपुर में एक छात्रा के अपहरण से जुड़े मामले में अपर सत्र न्यायाधीश अपर्णा देव ने मुख्य दोषी मनोज कुमार निषाद को तीन वर्ष कारावास और 5,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस मामले में पीड़िता को छिपाने के दोषी बाबूराम, श्यामदेई और इमरती को भी तीन वर्ष कारावास और 8,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि अर्थदंड का भुगतान न करने पर दोषियों को दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अतिरिक्त, अर्थदंड की आधी राशि पीड़िता को बतौर मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है। यह मामला बक्सा थाने में आरोपितों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) के आधार पर चला। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, घटना के समय पीड़िता की उम्र 17 वर्ष थी और वह टीडी कॉलेज में अध्ययनरत थी। आरोपी नवीन पीड़िता से शादी करना चाहता था। यह घटना 4 मार्च 2008 को उस समय हुई थी, जब पीड़िता एक छप्पर में बैठकर सिलाई कर रही थी। आरोपी मनोज कुमार निषाद और नवीन निषाद मोटरसाइकिल से घटनास्थल पर पहुंचे और पीड़िता का अपहरण कर लिया। पुलिस और परिवार के दबाव के बाद, आरोपितों ने 6 मार्च 2008 को पीड़िता को टीडी कॉलेज के गेट के सामने छोड़ दिया। पीड़िता अपने घर पहुंची और उसने बताया कि नवीन और मनोज उसे अपहरण कर बाबूराम निषाद के घर ले गए थे। बाबूराम, उसकी पत्नी श्यामदेई और दयाराम की पत्नी इमरती ने पीड़िता को मकान की ऊपरी मंजिल के एक कमरे में बंद कर रखा था। पीड़िता के बयान के अनुसार, इस दौरान नवीन ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

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