गोरखपुर में छठ पूजा की तैयारियां अपने अंतिम रूप में है। शहर के प्रमुख घाटों पर लोग जुटकर साफ-सफाई और सजावट में लगे हुए हैं। रामघाट पर सुबह से ही लोगों की भीड़ देखी जा रही है। यहां किसी के हाथ मिट्टी में सने हैं तो कोई रंगोली बनाने में लगा हुआ है। कोई हाथ में झाड़ू लिए है, तो कोई खुरपी और कुदाल लेकर घाट की मिट्टी समतल कर रहा है। सभी मिलकर घाट को साफ-सुथरा और सुंदर बनाने में जुटे हैं।नगर निगम की ओर से पूरे इलाके में लाइटिंग का काम भी कराया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को अंधेरे में कोई परेशानी न हो। साथ ही, नदी किनारे की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जेसीबी मशीनों से मिट्टी हटाकर घाट तक जाने का रास्ता बनाया जा रहा है, जिससे लोगों को आने-जाने में दिक्कत न हो। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने नदी किनारे तैयारियों का जायज़ा लिया, तो वहां कई महिलाएं छठ गीत गाते हुए बेदी बनाने का काम कर रही थीं। माहौल भक्तिमय दिखा। उसी दौरान एक महिला ने पारंपरिक गीत “जोड़े-जोड़े फलवा” गाकर सबका मन मोह लिया। बातचीत के दौरान महिला ने बताया, “मैं पिछले 7 सालों से छठ का व्रत रख रही हूं। छठी मईया ने मेरी मनोकामना पूरी की। वहीं, एक पुरुष ने बताया कि उनके यहां भी 10 सालों से छठ पूजा होती चली आ रही है। हर साल पूरी श्रद्धा से छठ मईया की आराधना होता है। घाट पर सफाई कर रहे कुछ युवकों से जब रिपोर्टर ने बात की, तो एक युवक ने बताया, “मैं यहां 3–4 दिन पहले से जगह छेकने आता हूं, लेकिन जब अगले दिन लौटता हूं तो कोई और वहां अपनी बेदी बना लेता है। अब मैंने करीब 25–30 लोगों के लिए एक जगह फिक्स कर ली है। अब उसे सजाने का काम चल रहा है। कोशिश करता हूं कि जिन्हें जगह नहीं मिल पाती, उन्हें मैं अपनी जगह से थोड़ा हिस्सा दे दूं ताकि सबको पूजा करने में सुविधा हो।” दैनिक भास्कर से बात करते हुए अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा ने बताया कि नगर निगम की ओर से सभी नदियों, तालाबों और पूजा स्थलों की सफाई और सजावट का काम लगभग पूरा हो गया है। उन्होंने बताया, “गोरक्षनाथ, रामघाट, मानसरोवर, गोरखनाथ मंदिर, सूरजकुंड जैसे प्रमुख स्थानों पर साफ-सफाई, ब्रांडिंग और बैरिकेटिंग का काम चल रहा है। सभी जोनल अधिकारी, जेई और एक्सईएन लगातार निरीक्षण कर रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो।”
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