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छठी भक्ति ‘संयम और शील’ है, जो जीवन अनुशासित बनाती:स्वामी प्रभंजनानंद शरण बोले- वनगमन केवल कष्ट नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा से भी जुड़ा

सिद्ध पीठ सियाराम किला, झुनकी घाट में आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन श्रद्धालु नवधा भक्ति के दिव्य रहस्यों से अभिभूत हो उठे। कथा स्थल पर उमड़ी भक्तों की भीड़ ने वातावरण को राममय बना दिया। पीठाधीश्वर महंत करुणानिधान शरण महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस कथा के द्वितीय दिवस पर डॉ. स्वामी प्रभंजनानंद शरण महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से भक्तों को भावविभोर कर दिया। उन्होंने माता कैकेयी के प्रसंग को एक नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हुए कहा कि माता कैकेयी ने भगवान श्रीराम को वनवास देकर उन्हें लोककल्याण और आदर्श स्थापना के लिए प्रेरित किया। यह वनगमन केवल कष्ट नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और आदर्शों की स्थापना का माध्यम बना।
कथा के दौरान महाराज ने नवधा भक्ति का अत्यंत सरल, भावपूर्ण और विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि नवधा भक्ति के नौ स्वरूप भगवान तक पहुंचने के नौ सरल मार्ग हैं। प्रथम भक्ति ‘संतों का संग’ है, जिसमें सत्संग के माध्यम से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। दूसरी भक्ति ‘कथा श्रवण’ है, जिसमें भगवान की लीलाओं को सुनकर मन निर्मल होता है।तीसरी भक्ति ‘गुरु पद सेवा’ है, जो अहंकार का त्याग सिखाती है। चौथी भक्ति ‘भगवान के गुणों का गान’ है, जिससे हृदय में प्रेम और श्रद्धा जागृत होती है। पांचवीं भक्ति ‘मंत्र जाप और अटूट विश्वास’ है, जो साधक को स्थिरता प्रदान करती है।
महाराज ने आगे बताया कि छठी भक्ति ‘संयम और शील’ है, जो जीवन को अनुशासित बनाती है। सातवीं भक्ति ‘समस्त जगत में भगवान का दर्शन’ है, जिससे द्वेष समाप्त होता है। आठवीं भक्ति ‘संतोष और सरलता’ है, जो जीवन को सहज और सुखमय बनाती है। नवमी और अंतिम भक्ति ‘पूर्ण समर्पण’ है, जिसमें भक्त स्वयं को पूरी तरह भगवान के चरणों में अर्पित कर देता है। उन्होंने कहा कि इन नौ भक्ति मार्गों को अपनाकर कोई भी साधारण व्यक्ति ईश्वर की कृपा का पात्र बन सकता है। श्रीराम कथा के माध्यम से समाज में सदाचार, प्रेम और भाईचारे का संदेश प्रसारित होता है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर “जय श्रीराम” के उद्घोष करते रहे। पूरा वातावरण भक्तिरस में सराबोर रहा। आयोजन में बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे, जो कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य मान रहे हैं।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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