चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन, पंचमी तिथि पर, प्रयागराज के शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस अवसर पर माँ दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप का पूजन किया गया। विशेष रूप से, अलोपीबाग स्थित माँ आलोप शंकरी मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। आलोप शंकरी मंदिर की अपनी विशिष्ट पहचान है। यहां देवी की कोई मूर्ति नहीं, बल्कि एक पालकी की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह वह स्थान है। जहां माता सती के दाहिने हाथ का पंजा ‘अलोप’ (लुप्त) हो गया था, जिसके कारण इस मंदिर का नाम आलोप शंकरी पड़ा। पंचमी के दिन मंदिर परिसर ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने माँ की पालकी पर नारियल, चुनरी और पुष्प अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं मांगीं। मंदिर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, और सेवादारों ने श्रद्धालुओं के लिए ठंडे जल व शरबत की व्यवस्था की। आलोप शंकरी के साथ-साथ प्रयागराज के अन्य प्राचीन मंदिरों में भी उत्सव का माहौल देखा गया। मीरापुर स्थित ललिता देवी शक्तिपीठ में नवरात्रि पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं, जहां दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। कल्याणी देवी मंदिर को भी भव्य रूप से सजाया गया है, जहां शाम की महाआरती विशेष आकर्षण का केंद्र रही। संगम किनारे स्थित लेटे हुए हनुमान जी (बड़े हनुमान) के मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। नवरात्रि के दौरान शक्ति के साथ-साथ शिव और राम भक्त हनुमान की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। यमुना तट पर स्थित मनकामेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आदि शक्ति और महादेव का आशीर्वाद लिया। विद्वानों के अनुसार, पंचमी के दिन स्कंदमाता की पूजा से मोक्ष और ज्ञान की प्राप्ति होती है। प्रयागराज की आध्यात्मिक भूमि पर नवरात्रि के दौरान संगम में स्नान कर इन शक्तिपीठों के दर्शन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

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