काशी में चैत्र नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी और ललिता गौरी की आराधना की जाती है। ऐसे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भोर से ही भक्तों की कतार लग गई। भक्त माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांग रहे हैं। देवी कात्यायनी की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वहीं कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है। देखें तस्वीर… सुबह से ही माता के नाम पहुंच रहे श्रद्धालु मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालु धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल और पुष्प अर्पित कर मां का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। मंदिर में गूंजते मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। विशेष रूप से माता को हल्दी और कुमकुम अर्पित करने की परंपरा का भी पालन किया गया। मान्यता है कि ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वहीं अविवाहित कन्याओं द्वारा माता का पूजन कर मनचाहा वर प्राप्त करने की कामना की जाती है। 40 दिन माता को हल्दी लेपन में मिलता है वर की प्राप्ति भगवती कात्यायनी के दर्शन करने से लोगों की मनोकामना पूरी होती है। मान्यता है कि कुंवारी कन्याएं मां को 40 दिन तक हल्दी का लेपन लगाती हैं तो उन्हें वर की प्राप्ति होती है। लड़के भी मां के चरणों में हल्दी लेपन करते हैं तो अच्छी कन्या मिलती है। कौन हैं माता कात्यायनी पंडित शिवशंकर मिश्रा ने बताया कि मां कात्यायनी की चार भुजाएं हैं, जिसमें वे कमल, तलवार आदि धारण करती हैं। कात्यायन ऋषि ने मां दुर्गा को अपने तप से प्रसन्न किया था, देवी ने जब उनको दर्शन देकर आशीर्वाद मांगने को कहा तो उन्होंने उनको अपनी पुत्री के रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। इसके बाद मां दुर्गा उनके घर पुत्री के रूप में प्रकट हुईं, जिनका नाम कात्यायनी पड़ा। वे अपने भक्तों को अभय प्रदान करती हैं। नवरात्रि में मां दुर्गा के इसी स्वरुप का पूजन किया जाता है।

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