चुनाव आयोग ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट की ‘सफाई’ के लिए चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रोग्राम की समय सीमा एक सप्ताह के लिए बढ़ाकर 14 फरवरी कर दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस मुद्दे पर कल से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान बड़ा हंगामा होने की संभावना है।
कब तक के लिए बढ़ी डेडलाइन?
चुनाव आयोग ने अपने तीन पन्नों के आदेश में कहा कि उसने पोल अधिकारियों को वोटरों की ड्राफ्ट लिस्ट पब्लिश करने के लिए एक और सप्ताह का समय दिया है।
पहले वोटर लिस्ट की गिनती का काम 4 दिसंबर को खत्म होना था और ड्राफ्ट लिस्ट 9 दिसंबर को जारी होनी थी। अब गिनती 11 दिसंबर को खत्म होगी, ड्राफ्ट लिस्ट 16 दिसंबर को पब्लिश होगी, और फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी को जारी होगी।
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क्यों बढ़ी डेडलाइन?
तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी और SIR प्रक्रिया को रीशेड्यूल करने की मांग की थी। उन्होंने आयोग से इस काम को बेहतर तरीके से प्लान करने का आग्रह किया था।
यह मांग उन रिपोर्ट्स के बीच आई है कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) पर बहुत ज़्यादा दबाव है, क्योंकि उन्हें तंग शेड्यूल में घर-घर जाकर यह बड़ा काम पूरा करना पड़ रहा है।
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से BLOs की आत्महत्या की खबरें भी आई हैं। पश्चिम बंगाल में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं।
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कितने नाम हटाए जाएंगे?
EC ने SIR एक्सरसाइज के तहत ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए जाने वाले वोटरों की अनुमानित संख्या को बढ़ा दिया है। न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, यह नया अनुमानित आंकड़ा लगभग 35 लाख है। इस 35 लाख के आंकड़े में, वे 18.70 लाख वोटर्स (जिनकी मौत हो चुकी है), डुप्लीकेट वोटर्स, ऐसे वोटर्स जिनका पता नहीं चल पा रहा है और वे वोटर्स जो हमेशा के लिए अलग-अलग राज्यों में चले गए हैं, शामिल हैं।
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