स्मार्ट मीटर को लेकर पीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता प्रेसवार्ता करते रहे और दूसरी ओर व्यापारी संगठन ने चीफ इंजीनियर दफ्तर का घेराव करते हुए वहां नोटिस चस्पा कर दिया। उनका आरोप था कि पीवीवीएनएल में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया है। स्मार्ट मीटर ने भ्रष्टाचार के एक नये युग की शुरुआत की है। काफी देर हंगामा चला। इसके बाद मुख्य अभियंता द्वितीय मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का आश्वासन देकर मामला शांत किया। चीफ इंजीनियर दफ्तर पर प्रदर्शन
उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में व्यापारी चीफ इंजीनियर के विक्टोरियापार्क स्थित दफ्तर पहुंचे और नारेबाजी शुरु कर दी। पीवीवीएनएल हाय..हाय और स्मार्ट मीटर हाय..हाय के नारों से पूरा परिसर गूंजने लगा। व्यापारियों का कहना था कि पीवीवीएनएल में भ्रष्टाचार घटने के बजाए कई गुना बढ़ गया है। कुछ योजनाएं तो ऐसी हैं कि उनका स्वरूप बदल बदलकर भ्रष्टाचार किया जाता है। स्मार्ट मीटर भी इन्हीं में से एक है। दरी बिछाकर धरना किया शुरु
काफी देर नारेबाजी के बावजूद जब किसी अफसर ने सुध नहीं ली तो व्यापारियों ने चीफ इंजीनियर के मुख्य गेट के सामने ही पार्क में दरी बिछा दी और पीए सिस्टम लगाकर धरना प्रदर्शन शुरु कर दिया। इस दौरान व्यापारियों के हाथ में स्लोगन लिखी पटि्टका भी मौजूद रहीं। व्यापारियों ने कहा कि अभी यह कुछ घंटे की भूखहड़ताल है लेकिन ऐसा ही चला तो यह अनिश्चितकालीन शुरु की जा सकती है। मीटिंग छोड़ो, काम करो के लगे नारे
शाम चार बजे तक का समय अफसरों को दिया गया था लेकिन कोई व्यापारियों के बीच नहीं पहुंचा। इससे खफा व्यापारियों ने नारेबाजी शुरु कर दी और वह चीफ इंजीनियर के दफ्तर में घुस गए। अंदर मीटिंग चलने का कर्मचारियों ने हवाला दिया तो नारेबाजी शुरु हो गई। मीटिंग छोड़ो-काम करो के नारे लगाते हुए व्यापारियों ने नोटिस निकाला और उसे चीफ इंजीनियर के दरवाजे पर चस्पा कर दिया। चीफ इंजीनियर रूरल गुरजीत सिंह व्यापारियों के बीच पहुंचे और कार्रवाई का आश्वासन देकर धरने को संपन्न कराया। व्यापारियों के द्वारा लगाए गए आरोप : – प्रीपेड मीटर के कारण हजारों व्यापारियों व उपभोक्ताओं की लाइट बिना वजह कट रही है।
– विभाग के प्रीपेड मीटर का सर्वर काम नहीं करता है।
– प्रीपेड मीटर के ऐप में जमा करने के बाद पेमेंट अपडेट नहीं हो रहा।
– पुरानी सिक्योरिटी एडजस्ट का डिटेल उपभोक्ता को उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
– अधिकारी मस्त है और उपभोक्ता परेशानी लेकर बिजली घरों पर भटक रहा है।
– बिना किसी आधार के वर्षों पुरानी रिकवरी भेजी जा रही है।
– कनेक्शन PD करने पर फाइनल PD बिल बनाने की आड़ में अवैध वसूली हो रही है।
– प्रीपेड मीटर लगाने के बाद अधिकांश उपभोक्ता के फोन नंबर अपडेट नहीं किए गए।
– प्रीपेड मीटर लगाने के बाद बड़ी संख्या में सीलिंग सर्टिफिकेट पोर्टल पर अपडेट नहीं है।
– प्रीपेड मीटर लगाने के बाद उपभोक्ता के मोबाइल में ऐप डाउनलोड नहीं हो रहे हैं।
– प्रीपेड मीटर के गारंटी कार्ड उपभोक्ता को नहीं दिए जा रहे हैं।
– प्रीपेड मीटर लगाते समय उपभोक्ता को मैन्युअल उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
– नए विद्युत कनेक्शन अप्लाई करने के बाद मनमाना एस्टीमेट बनाकर उत्पीड़न किया जा रहा है।
– विद्युत चोरी की फर्जी कार्रवाई की शिकायत करने पर जांच के नाम पर कई कई साल मामला लटकाया जाता है।

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