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चीता-तेंदुआ के अंगों की तस्करी में 6 दोषी:लखनऊ CBI कोर्ट ने सुनाई 2 साल की सजा, 2000 में दर्ज हुआ था मुकदमा

सीबीआई की जांच में सामने आए एक बड़े वन्यजीव तस्करी मामले में लखनऊ की CBI कोर्ट ने छह आरोपियों को दोषी करार दिया है। चीता और तेंदुए के अंगों की अवैध तस्करी से जुड़े इस मामले में अदालत ने सभी दोषियों को दो-दो साल की सजा और जुर्माने से दंडित किया है, जिससे वन्यजीव अपराध के खिलाफ सख्त संदेश गया है। लखनऊ CBI कोर्ट ने मुमताज अहमद, जैबुन निशा, अजीज उल्लाह, वहीद, सरताज और मजीद को दोषी करार दिया। अदालत ने सभी छह आरोपियों को दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने माना कि आरोपी संगठित तरीके से वन्यजीव तस्करी के अवैध नेटवर्क का हिस्सा थे। छापेमारी में भारी मात्रा में मिले थे अंग मामले की जांच के दौरान CBI ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित वन्यजीव के अंग बरामद किए थे। बरामद सामग्री में 18,000 तेंदुए के नाखून, 74 तेंदुए की खाल, 4 बाघ की खाल और बाघ-तेंदुए की हड्डियां शामिल थीं। ये सभी वस्तुएं अत्यंत संवेदनशील श्रेणी में आती हैं और इनका व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के वन्यजीव अंगों की तस्करी अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए की जाती है, जो एक संगठित अपराध का रूप ले चुकी है। 1972 कानून के तहत सबसे सख्त सुरक्षा बरामद सभी वन्यजीव सामग्री वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 की अनुसूची-1 के अंतर्गत आती है। इस श्रेणी में आने वाले वन्यजीवों को देश में सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा प्राप्त है। इनके शिकार, संग्रह, व्यापार या परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध है। CBI ने इस मामले को 23 मार्च 2000 को दर्ज किया था। शुरुआती जांच में ही वन्यजीव तस्करी के संगठित गिरोह के सक्रिय होने के संकेत मिले थे। इसके बाद विस्तृत जांच करते हुए 15 जुलाई 2000 को लखनऊ की अदालत में शिकायत दाखिल की गई। करीब दो दशक लंबे ट्रायल और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया। आपराधिक साजिश और तस्करी के आरोप साबित कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर यह माना कि आरोपी न केवल प्रतिबंधित वन्यजीव सामग्री के कब्जे में थे, बल्कि उसके अवैध व्यापार में भी सक्रिय रूप से शामिल थे। अदालत ने उन्हें वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 की धारा 49B और 51 के साथ-साथ IPC की धारा 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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