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चित्रकूट में 19 मार्च से दर्शन परिषद का अधिवेशन:वैश्विक चुनौतियों पर मंथन को जुटेंगे देश-विदेश के विद्वान


                 चित्रकूट में 19 मार्च से दर्शन परिषद का अधिवेशन:वैश्विक चुनौतियों पर मंथन को जुटेंगे देश-विदेश के विद्वान

चित्रकूट में 19 मार्च से दर्शन परिषद का अधिवेशन:वैश्विक चुनौतियों पर मंथन को जुटेंगे देश-विदेश के विद्वान

उत्तर भारत दर्शन परिषद का 40वां राष्ट्रीय अधिवेशन 19 मार्च से चित्रकूट में शुरू होगा। तीन दिवसीय इस आयोजन में भारतीय दर्शन के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों पर गहन मंथन किया जाएगा। 21 मार्च तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय संवाद में देश-विदेश के विद्वान, शोधार्थी और शिक्षाविद भाग लेंगे। यह आयोजन भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहयोग से उत्तर भारत दर्शन परिषद द्वारा जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट में किया जा रहा है। कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान की भी सहभागिता रहेगी। संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘वैश्विक शांति: चुनौतियां और समाधान’ रखा गया है। पहले दिन, 19 मार्च को उद्घाटन सत्र के साथ अधिवेशन का औपचारिक शुभारंभ होगा। इस दौरान प्रो. संगम लाल पाण्डेय स्मृति व्याख्यान, देवात्म व्याख्यान और योग विज्ञानी महाराज स्मृति व्याख्यान सहित कई प्रतिष्ठित अकादमिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। दिनभर विचार-विमर्श के बाद परिषद की कार्यकारिणी और सामान्य सभा की बैठक होगी, जबकि शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 20 मार्च को पद्म विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य मुख्य उद्बोधन देंगे। उनका विषय ‘भारतीय दर्शन में सनातन धर्म की मीमांसा’ रहेगा। इस दिन सनातन परंपरा, विपश्यना, आधुनिकता और अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। अंतिम दिन, 21 मार्च को शोधपत्र वाचन और तकनीकी सत्र होंगे। युवा शोधार्थियों और शिक्षकों के शोधपत्रों का मूल्यांकन कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा, जिसके बाद समापन समारोह आयोजित होगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि भारतीय दर्शन केवल शास्त्र नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली चेतना है। यह समाज को शांति, संतुलन और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाता है। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे मंच वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 1975 में स्थापित उत्तर भारत दर्शन परिषद दर्शनशास्त्र के क्षेत्र में शोध और प्रकाशन के जरिए महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। वहीं, 2001 में स्थापित जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय दिव्यांगजनों को उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने वाला देश का प्रमुख संस्थान है।


Sourse: Dainik Bhaskar via DNI News

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