चित्रकूट के रघुवीर मंदिर में 108 बटुकों का सामूहिक उपनयन संस्कार वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन चैत्र शुक्ल पक्ष द्वादशी को परम पूज्य संत श्री रणछोड़दास जी महाराज द्वारा स्थापित गुरुकुल श्री राम संस्कृत महाविद्यालय के अंतर्गत हुआ। इस अवसर पर मंदिर परिसर में आचार्यों के निर्देशन में ग्रहशांति यज्ञ, गुरुपूजन, मंत्रदीक्षा, दण्डधारण और भिक्षाटन जैसे विधान संपन्न किए गए।
श्री राम संस्कृत विद्यालय के प्राचार्य ने यज्ञोपवीत संस्कार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस संस्कार के उपरांत ही गुरुकुल के विद्यार्थियों को वेद-शास्त्रों के अध्ययन का अधिकार प्राप्त होता है। प्राचीन वैदिक-सनातन परम्परा में यह ब्रह्मचर्य आश्रम की एक आवश्यक क्रिया है और सोलह संस्कारों में से एक है। शास्त्रों में उपनयन को ‘द्विज’ का दूसरा जन्म भी माना गया है।
इस अवसर पर श्री सदगुरू सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं डायरेक्टर डॉ. इलेश जैन, श्री सदगुरू शिक्षा समिति की अध्यक्षा उषा जैन, डॉ. इलेश जैन की धर्मपत्नी मौसम जैन उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त, भारत के विभिन्न प्रांतों से आए गुरु भाई-बहन, सभी आचार्यगण, विद्यार्थी, अभिभावक और सदगुरु परिवार के सदस्य भी मौजूद थे।

Leave a Reply