भास्कर न्यूज | खगड़िया जिले में बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन हरियाली योजना का हाल बेहद खस्ता है। हालिया सरकारी सर्वे रिपोर्ट में जल जीवन हरियाली अभियान में जिले को 31वां स्थान मिला है, जो योजना की विफलता का स्पष्ट संकेत है। पर्यावरण संरक्षण, भूजल स्तर बनाए रखने और जल संरक्षण के नाम पर शुरू की गई यह मुहिम कागजों पर तो जोर-शोर से चल रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। बेलदौर प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में योजना के तहत अतिक्रमित तालाबों-आहर-पाइनों का जीर्णोद्धार, निजी जमीन पर नए तालाब निर्माण, सोख्ता और वृक्षारोपण का कार्य बड़े पैमाने पर शुरू किया गया था। लेकिन देखभाल के अभाव में ये प्रयास नाकाम साबित हुए। निर्माणाधीन सोख्तों और लगाए गए पौधे कुछ ही महीनों में सूखकर नष्ट हो गए। तेलिहार पंचायत में स्थित बायसी जलकर का जीर्णोद्धार सबसे चर्चित उदाहरण है। जनवरी 2020 में मुख्यमंत्री के हाथों 1 करोड़ 97 लाख रुपये की लागत से इसका शिलान्यास हुआ। सीएम नीतिश कुमार ने बांध पर पेड़ लगाकर कार्य शीघ्र पूरा करने का आश्वासन दिया था। लेकिन चार वर्ष बाद भी निर्माण अधूरा रहा। जलकर के संरक्षक/सीक्रेटरी राजेश कुमार ने शिकायत की है कि संवेदक ने आधा-अधूरा काम कर फरार हो गया। मिट्टी नहीं निकालने से जल स्तर मात्र 2-2.5 फीट रह गया है, जबकि 5 फीट पानी जमा रहने की बात कही गई थी। इससे मत्स्य पालन प्रभावित हुआ और मछुआरों को दो बार करीब 5 लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ा। लाखों रुपये खर्च के बावजूद मछुआरे लाभ से वंचित हैं। जलकर को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना के तहत एनएच 107 के रामनगर गांव से पहुंच पथ और तेलिहार गांव से पेवर ब्लॉक पथ बनाया गया। लेकिन पांच वर्ष बाद भी दूसरा पथ धूल-मिट्टी से भरा है। बांध किनारे और पहुंच पथ पर लगाए गए पौधे देखभाल के अभाव में सूख चुके हैं। रोशनी के लिए लगे बिजली पोल तारविहीन पड़े हैं, जिससे रात में जलकर अंधेरे में डूबा रहता है। जलकर का आधा हिस्सा जंगल-झाड़ियों से घिरा है।
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