चमोली जिले के पीपलकोटी स्थित THDC जल विद्युत परियोजना क्षेत्र में बनी सुरंग के अंदर मंगलवार रात करीब 9 बजे दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गईं, जिसमें 70 मजदूर घायल हो गए हैं। जिनमें से 5 की हालत गंभीर बनी हुई है। दुर्घटना के समय ट्राली में करीब 110 इंजीनियर, कर्मचारी और मजदूर सवार थे, जो अपनी शिफ्ट पूरी कर वापस लौट रहे थे। हादसे में घायल हुए लोगों में से 70 को जिला अस्पताल गोपेश्वर और 17 को विवेकानंद अस्पताल पीपलकोटी में भर्ती कराया गया है। 66 घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। चार श्रमिकों को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। पीपलकोटी के विवेकानंद चिकित्सालय में 18 श्रमिकों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें घर भेज दिया गया। 21 श्रमिकों को कोई चोट नहीं आई थी और वे घटना स्थल से ही घर चले गए थे। घायलों में अधिकतर मजदूर बिहार, ओडिशा और झारखंड के रहने वाले हैं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई, जिसके बाद अन्य कर्मचारियों की मदद से सभी घायलों को बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया। घटना की सूचना मिलते ही सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जिलाधिकारी चमोली से फोन पर बात कर पूरे मामले की जानकारी ली। सीएम ने निर्देश दिए कि सभी घायलों को बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सालयों में रेफर किया जाए। मौके पर पहुंचे डीएम सौरभ कुमार के अनुसार हादसा शिफ्ट चेंज के दौरान हुआ है, गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के हाथ-पैर में फ्रैक्चर आया है। इस घटना का भारतीय रेलवे से कोई सम्बन्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि एक ट्राली सामान लेकर सुरंग के भीतर जा रही थी, तभी उसके ब्रेक फेल हो गए और वह दूसरी ट्राली से टकरा गई। टक्कर के बाद दोनों ट्रालियां पलट गईं। घटना से जुड़ी PHOTOS… टक्कर से ट्रेन के अंदर ही गिरे मजदूर हादसा परियोजना क्षेत्र के टीवीएम साइड पर हुआ। टक्कर इतनी तेज थी कि कई मजदूर ट्रेन के भीतर गिर पड़े और उन्हें गंभीर चोटें आईं हैं, हालांकि ज्यादातर मजदूरों को हल्की चोटें लगी हैं। घटना के बाद सुरंग के अंदर ही अफरातफरी का माहौल बन गया और परियोजना प्रबंधन तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा। सभी घायलों को अस्पताल में पहुंचा दिया गया है। जानिए क्या है विष्णुगाड़‑पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना… 2013 में काम हुआ था शुरू
विष्णुगाड़‑पीपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। यह परियोजना अलकनंदा नदी पर बनाई जा रही है, जो गंगा नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है। विष्णुगाड़‑पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना का निर्माण करीब 2013‑2014 से शुरू हुआ, जब सिविल कार्यों और भूमि अधिग्रहण के साथ परियोजना का ठेका EPC कंपनियों को दिया गया। इसके बाद धीरे‑धीरे बांध, टनल और पावर हाउस जैसे बड़े ढांचे का निर्माण शुरू हुआ। 444 मेगावाट है परियोजना की क्षमता
परियोजना का मुख्य उद्देश्य बिजली उत्पादन करना है। इसके लिए नदी में 65 मीटर ऊंचा डायवर्जन बांध बनाया गया है, जिससे पानी को नियंत्रित तरीके से टर्बाइन तक ले जाया जाएगा। जलाशय की कुल क्षमता 3.63 मिलियन घन मीटर है, जिसमें से लगभग 2.47 मिलियन घन मीटर सक्रिय रूप से बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल होगा। परियोजना में पानी को पावर हाउस तक पहुंचाने के लिए टनल और पाइपलाइन सिस्टम बनाया गया है। इसमें 3 इंटेक टनल, 3 डी-सिल्टिंग चैंबर, हेड रेस टनल, सर्च शाफ्ट और 2 प्रेशर शाफ्ट शामिल हैं। पावर हाउस में दो भूमिगत हॉल हैं – मशीन हॉल और ट्रांसफॉर्मर हॉल, जहां टर्बाइन और ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएंगे। परियोजना की कुल क्षमता 444 मेगावाट है। इससे सालाना लगभग 1657 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन होगा। इस बिजली का 13% उत्तराखंड राज्य को निशुल्क दी जाएगी और 1% स्थानीय क्षेत्र के विकास में उपयोग होगा। कई तकनीकी काम हुए पूरे
साल 2025 में परियोजना में कई तकनीकी काम पूरे हुए। 16 जनवरी 2025 को यूनिट‑2 में डीटी लाइनर (पानी की नलिकाओं को मजबूत करने वाली लाइनिंग) का निर्माण पूरा किया गया। इसके बाद 22 फरवरी 2025 को ईओटी क्रेन का यूनिट‑1 तक विस्तार किया गया, जिससे भारी मशीनों और उपकरणों को पावर हाउस तक आसानी से पहुंचाया जा सके। TRT लाइनिंग और सर्विस बे का चल रहा विस्तार
वर्तमान में परियोजना में TRT लाइनिंग (मुख्य पानी के मार्ग की लाइनिंग) और सर्विस बे का विस्तार चल रहा है। साथ ही, मशीन हॉल और ट्रांसफॉर्मर हॉल में टर्बाइन और ट्रांसफॉर्मर के इंस्टॉलेशन और टेस्टिंग के काम भी जारी हैं। ये सभी कार्य परियोजना को दिसंबर 2026 तक चालू करने के लक्ष्य के अनुरूप किए जा रहे हैं। उत्तर भारत में बिजली की कमी होगी पूरी
परियोजना से उत्तर भारत में बिजली की कमी को पूरा करने, रोजगार पैदा करने, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और वन्य जीवन के संरक्षण जैसे फायदे भी होंगे। परियोजना का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक पूरा करना है। अगस्त में भी हुआ था हादसा विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के हेलंग स्थित डाइवर्जन साइट पर अगस्त में मानसून के दौरान भी हादसा हुआ था। तब सुरंग के ठीक ऊपर भारी भूस्खलन के साथ पत्थरों की बरसात हुई। इस दौरान सुरंग और डाइवर्जन साइट पर कार्य चल रहा था। तब वहां काम कर हरे लोगों ने भाग कर जान बचाई है। इसमें 12 लोग घायल हुए थे। भूस्खलन के दौरान डाइवर्जन-साइट व इनटेक टनलों में 100 से ज्यादा मजदूर और इंजीनियर कार्य कर रहे थे। ———–
ये खबर भी पढ़ें…. अल्मोड़ा बस हादसे पर PM मोदी ने जताया दुख:160 फीट खाई में गिरने से 7 की मौत, 12 गंभीर घायल उत्तराखंड के अल्मोड़ा में आज सुबह यात्रियों से भरी बस 160 फीट गहरी खाई में गिर गई, जिससे 7 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 12 से ज्यादा लोगों की हालत गंभीर है। हादसा भिकियासैंण-रामनगर मार्ग पर शीलापानी (विनायक क्षेत्र) के पास सुबह करीब 8 बजे हुआ, जिसकी दूरी भिकियासैंण से लगभग 8 किलोमीटर आगे है। (पढ़ें पूरी खबर)
https://ift.tt/DwW3vVP
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply