अगर 30 किमी का सफर और तय हो जाता तो शायद सभी अपने घर सकुशल पहुंचते। मगर, होनी को ये मंजूर नहीं था। घर से 30 किमी पहले ही मौत ने ऐसा झपट्टा मारा कि एक ही परिवार की 5 जिंदगियां छीन ली। सब रोते बिखलते रख गए। गमगीन माहौल में शुक्रवार को ही पांचों का अंतिम संस्कार हो गया।
बुलेरो चला रहे ऋषि ने अपने दोस्त से गाड़ी की स्टेयरिंग अपने हाथ में ले ली थी। 15 मिनट तक वह रात के अंधेरे में गाड़ी दौड़ता रहा। मगर, अचानक सड़क में मोड़ आया और ऋषि गाड़ी से संतुलन खो बैठा। गाड़ी में सवार 5 जिंदगियां हमेशा के लिए शांत हो गईं। बाह सीएचसी में पोस्टमार्टम के बाद पांचों के शव इटावा पहुंचे। यहां नम आंखों से यमुना घाट पर दादा, बेटे-बहु और पोती का अंतिम संस्कार हुआ। वहीं, नाती के शव को औरैया उसके घर भेज दिया। पहले पढ़िये पूरा घटनाक्रम
आगरा में पिता, बेटा-बहू और पोती समेत 5 की मौत:नवरात्रि पर दर्शन करके लौट रहे थे, बोलेरो के दरवाजे तोड़कर लाश निकाली
आगरा में गुरुवार रात श्रद्धालुओं से भरी बोलेरो कार पेड़ से टकरा गई। हादसे में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में पिता, बेटा, बहू, पोती और नाती शामिल हैं। तीन लोग घायल हैं। हादसे के बाद गांव वालों ने गाड़ी के शीशे तोड़कर सभी को बाहर निकाला।
परिवार के लोग नवरात्रि के पहले दिन इटावा से राजस्थान के कैलादेवी मंदिर के दर्शन करने गए थे। लौटते समय गाड़ी चला रहे ड्राइवर को झपकी आने लगी। तभी परिवार के 20 साल के नाती ने गाड़ी चलाने के लिए कहा। 15 मिनट पहले ही बदला ड्राइवर
ड्राइवर ने जैसे ही लड़के को गाड़ी चलाने को दी। इसके करीब 15 मिनट बाद गुरुवार रात 11 बजे थाना चित्राहाट क्षेत्र में हादसा हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बोलेरो का आगे का हिस्सा पूरी तरह खत्म हो गया। गाड़ी की आधी छत तक उखड़ गई। मृतकों की पहचान इटावा के इकदिल के गांव नगला वर के रहने वाले कांता प्रसाद (70), उनके बेटे देवेंद्र (35), बहू सीमा (30), पोती आराध्या (3) और गाड़ी चला रहे नाती औरैया थाना क्षेत्र के अजीतमल के गांव प्रतापपुर निवासी ऋषि (20) के रूप में हुई है। घायलों में देवेंद्र का बेटा आदित्य, ऋषभ की पत्नी रश्मि और अवनीश शामिल हैं। घर सिर्फ 30 किमी दूर रह गया
आगरा के चित्राहट में जिस जगह पर हादसा हुआ वहां से मृतकों का घर सिर्फ 30 किमी दूर रह गया था। जबकि घटना स्थल से लगभग 200 किमी दूर तक वे सकुशल पहुंच गए थे। घटनास्थल से घर की दूरी महज एक घंटे की रह गई थी। अगर, ये दूरी भी तय हो जाती तो सभी सकुशल घर में होते। दोस्त की बुलेरो से गए थे
बुलेरो चालक ऋषि के दादा गंगादीन ने बताया कि नवरात्रि में देवेंद्र के पिता कांता प्रसाद ने कैलादेवी दर्शन की इच्छा जताई थी, तभी मंदिर जाने का प्लान बना। 18 मार्च को दो गाड़ियों से परिवार और रिश्तेदारी के 18 लोग दर्शन के लिए निकले थे। बोलेरो में देवेंद्र का परिवार सवार था। बोलेरो देवेंद्र के दोस्त अवनीश की थी। देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, ‘कार पेड़ से टकराने के बाद धमाके जैसी तेज आवाज आई। हम लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे। कार के दरवाजे खोलने की कोशिश की गई, लेकिन नहीं खोल पाए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। थोड़ी देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची। फिर कार के दरवाजे तोड़कर सभी को बाहर निकाला गया।
जिसने भी घटनास्थल का वह सीन देखा, उसके रोंगटे खड़े हो गए।

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