छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स और खादी ग्रामोद्योग के साझा प्रयास से शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में एक विशेष सेमिनार और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे कैबिनेट मंत्री राकेश कुमार सचान ने खादी के बदलते स्वरूप पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में खादी केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की पहचान बन चुकी है। खादी उत्पादों के बढ़ते निर्यात से न केवल देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि स्थानीय कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है। आजादी के आंदोलन से अर्थव्यवस्था तक, खादी का सफर सेमिनार के दौरान विशेषज्ञों ने खादी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा की। विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने महात्मा गांधी के विचारों को याद करते हुए बताया कि खादी ने स्वतंत्रता संग्राम में जो भूमिका निभाई थी। वही भूमिका अब देश के आर्थिक सशक्तिकरण में निभा रही है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे खादी को केवल परंपरा न मानें, बल्कि इसे एक आधुनिक लाइफस्टाइल और राष्ट्रहित से जोड़कर देखें। कारीगरों को मिल रही ग्लोबल पहचान, बढ़ रहा है आयात-निर्यात कैबिनेट मंत्री ने अपने संबोधन में खास तौर पर इस बात को रेखांकित किया कि खादी अब गांवों की सीमाओं से निकलकर वैश्विक बाजारों तक पहुंच चुकी है। नई तकनीकों और डिजाइन्स के समावेश ने इसे युवाओं के बीच भी लोकप्रिय बना दिया है। जिला परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी अशोक कुमार शर्मा ने विभाग की वर्तमान योजनाओं की जानकारी दी और बताया कि कैसे सरकारी मदद से ग्रामीण उद्यमी अपने उत्पादों को बड़े शहरों और विदेशों तक भेज रहे हैं। प्रदर्शनी में दिखी कला और आधुनिकता,छात्रों ने दिखाए हुनर
यूनिवर्सिटी के फाइन आर्ट्स संस्थान की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रही। इसमें खादी से बनी विविध कलाकृतियों और उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। छात्रों और दर्शकों ने देखा कि कैसे पारंपरिक बुनाई को आधुनिक फैशन और कला के साथ जोड़ा जा सकता है। कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा, प्रो. ब्रिष्टि मित्रा और प्रो. अंशु यादव ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और छात्रों के नवाचार की सराहना की। कार्यक्रम को सफल बनाने में इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. मिठाई लाल और डॉ. प्रशांत सिंह का विशेष योगदान रहा। आयोजन टीम में जे.बी. यादव, डॉ. राज कुमार सिंह और डॉ. रणधीर सिंह के साथ-साथ सहायक प्रोफेसर डॉ. मंतोष यादव, तनीषा वधावन और डॉ. बप्पा माजी जैसे शिक्षक शामिल रहे। बड़ी संख्या में मौजूद विद्यार्थियों ने खादी ग्रामोद्योग के क्षेत्र में करियर की संभावनाओं और स्वरोजगार के तरीकों को समझा।

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