लखनऊ में ट्रैफिक को तेज और सुचारु बनाने के उद्देश्य से बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर पर अभी कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। निर्माण के दौरान कुछ तकनीकी कमियां रह गई हैं। निशातगंज रोटरी पर पीक ऑवर में ट्रैफिक बाधित हो रहा है और वाहन चालकों को जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है। स्थिति को संभालने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने हनुमान सेतु के पास ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया है। अब डालीगंज से आने वाले वाहन चालकों को आईटी चौराहे की ओर लंबे कट से होकर ग्रीन कॉरिडोर पर नहीं जाना पड़ेगा। इसके लिए हनुमान सेतु मंदिर के सामने नया कट बनाया गया है, जहां से वाहन मंदिर के पीछे वाले रास्ते से सीधे ग्रीन कॉरिडोर पर पहुंच सकेंगे। आईटी चौराहे से परिवर्तन चौराहे की ओर जाने वाले वाहनों को भी ग्रीन कॉरिडोर की मुख्य धारा से हटाकर मंदिर के पीछे वाले मार्ग से घुमाया जा रहा है, ताकि ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके। इन बदलावों के बावजूद पीक ऑवर में जाम की स्थिति बन रही है। इस रिपोर्ट में पढ़िए सारी कमियां… निशातगंज रोटरी पर हादसे का खतरा ग्रीन कॉरिडोर का निशातगंज रोटरी सबसे संवेदनशील स्थान बन गया है। यहां बना अंधा कट वाहन चालकों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। हनुमान सेतु की ओर से आने वाले वाहन चालकों को सिकंदरबाग चौराहे की तरफ से आने वाला ट्रैफिक साफ दिखाई नहीं देता। दूसरी ओर मंदिर होने के कारण मोड़ पर दृश्यता भी कम है, जिससे कई बार रोटरी पर टकराव जैसी स्थिति बन जाती है। दिन के समय यहां ट्रैफिक पुलिसकर्मी व्यवस्था संभालते हैं, लेकिन रात में पुलिसकर्मी तैनात न होने से जोखिम और बढ़ जाता है। साइन बोर्ड न होने से वाहन चालकों में भ्रम डालीगंज की ओर से मनकामेश्वर मंदिर की तरफ जाने वाले वाहन चालकों को रोटरी पर दिशा समझने में परेशानी हो रही है। एलडीए की ओर से मार्गदर्शन के लिए कहीं भी साइन बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। इससे वाहन चालक रोटरी पर भ्रमित हो जाते हैं और ट्रैफिक संचालन प्रभावित होता है। डिवाइडर पर लगे अशोक के पेड़ सूखने लगे ग्रीन कॉरिडोर के सौंदर्यीकरण के लिए डिवाइडर पर लगाए गए अशोक के पेड़ भी देखरेख के अभाव में सूखने लगे हैं। करीब 300 से अधिक पेड़ पानी न मिलने के कारण खराब स्थिति में पहुंच गए हैं और कई अन्य पौधे भी मुरझा रहे हैं।

Leave a Reply