सिटी रिपोर्टर|मोतिहारी मनरेगा योजना के तहत जिले में होने वाले पक्का वर्क पिछले 4 माह से ठप है। पक्का वर्क नहीं होने से जिले के 396 पंचायतों में योजना स्वीकृति के बावजूद काम नहीं हो रहा है। बताया जाता है कि ग्रामीण विकास विभाग की ओर से एसएनए स्पर्श पोर्टल लांच किया जा रहा है। इस पोर्टल के लांच होने के कारण 4 माह से कोई भी बिल अपलोड नहीं हो पा रहा है। ऐसे में चयनित एजेंसियों का भुगतान नहीं होने की स्थिति में सामग्रियों की सप्लाई नहीं हो पा रही है। इस कारण पक्का वर्क ठप पड़ा हुआ है। विभाग की ओर से बताया गया है कि अभी पोर्टल के पूरी तरह फंक्शनल होने में कम से कम एक माह का समय लग सकता है। ऐसे में जनवरी से मार्च तक मात्र तीन माह ही कार्य के लिए शेष बच सकेंगे। मात्र तीन माह में जो योजनाएं स्वीकृत हो चुकी है, उसे पूरा कर पाना मुश्किल है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह टेक्निकल मामला है। ऐसे में कुछ नहीं किया जा सकता है। जो मजदूरी मद का पैसा है, उसका भुगतान किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, मनरेगा योजना से जिले के सभी प्रखंडों में करीब 800 पक्का योजनाएं स्वीकृत है। इन योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद भी काम ठप है। इनमें पीसीसी, चबूतरा निर्माण, छठ घाट निर्माण, सार्वजनिक शौचालय, हाट भवन निर्माण आदि शामिल है। हालांकि मनरेगा योजना के तहत मजदूर के द्वारा किया जाने वाले कार्य चल रहा है। इसमें पोखरा खुदाई, पौधरोपण, नहर-नाला सफाई आदि शामिल है। बताया जाता है कि जितना आवंटन मिलता है उसका 60 फीसदी मजदूरों से होने वाले कार्य में और 40 फीसदी राशि पक्का वर्क में खर्च किया जाता है। बता दे कि मनरेगा के तहत सामग्री सप्लाई के लिए अगस्त में 156 एजेंसियों का चयन हुआ है। इन सभी एजेंसियों का चयन लॉटरी सिस्टम से किया गया था। लेकिन एसएनए स्पर्श पोर्टल के कारण अभी काम शुरू तक नहीं हो पाया है। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भी एजेंसी का नए सिरे से चयन के लिए जनवरी में निविदा निकलने की उम्मीद है। एसएनए स्पर्श पोर्टल यह एकीकृत प्रणाली है एसएनए-स्पर्श एक एकीकृत प्रणाली है जो केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न योजनाओं के लिए ठीक समय पर फंड ट्रांसफर की सुविधा प्रदान करती है। यह केंद्रीय और राज्य के कोषों को एकीकृत करने के लिए एक ऑटोमेटिक पोर्टल है, जिसमें पीएफएमएस, राज्य के आईएफएमआईएस और आरबीआई के ई-कुबेर जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं में पारदर्शिता, दक्षता को और मजबूत करना है, जिससे धन का दुरुपयोग रुके और फंड के प्रवाह में तेजी आए। इससे फंड के दुरुपयोग को रोकती है और वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाती है। वहीं फंड सीधे अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचते हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है।
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