चित्रकूट: लगभग 10 वर्ष पूर्व पंचायत चुनाव के दौरान एक प्रत्याशी के पक्ष में मतदान का दबाव बनाने के लिए डकैतों के साथ गांव में जाकर ग्रामीणों को धमकाने और पीटने के मामले में न्यायालय ने दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। इन दोनों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और छह-छह हजार रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता गोपालदास ने बताया कि यह मामला 4 दिसंबर 2015 का है। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर रानीपुर कल्याणगढ़ निवासी मुन्ना त्रिपाठी की तहरीर के आधार पर मानिकपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। मैदान से हट जाने की धमकी शिकायतकर्ता के अनुसार, घटना वाली रात दस्यु बबली कोल बनकर आठ-दस बदमाश रानीपुर गांव में चुन्नू के घर पहुंचे। उन्होंने दरवाजा खुलवाकर अंदर घुसकर चुनाव चिन्ह ‘गदा’ में वोट डलवाने के लिए गाली-गलौज की और मारपीट भी की। बदमाशों ने कोल आदिवासियों के वोट दिलवाने और अन्य सभी प्रत्याशियों को चुनाव मैदान से हट जाने की धमकी दी थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने बदमाशों द्वारा की गई मारपीट की शिकायत करने के लिए तत्कालीन थाना प्रभारी को फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। अगले दिन सुबह 10 बजे पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल इस मामले में दस्यु बबली कोल, लवलेश कोल के अलावा निही गांव के छोटू उर्फ छोटुवा और नौबस्ता गांव के चौधरी उर्फ रजोला के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। मुकदमे के विचारण के दौरान दस्यु बबली कोल और लवलेश कोल पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। छोटू उर्फ छोटुवा और चौधरी उर्फ रजोला जेल में बंद थे और उन्होंने स्वेच्छा से अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था। बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश नीरज श्रीवास्तव ने इस मामले में निर्णय सुनाया। न्यायालय ने छोटू उर्फ छोटुवा और चौधरी उर्फ रजोला को दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास के साथ छह-छह हजार रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई।

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