गोरखपुर में बुधवार को मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में कार्यक्रम तय होने के कारण नगर निगम ने विश्वविद्यालय के मुख्य मार्ग और आसपास के इलाकों में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। हटाया गया अतिक्रमण इस दौरान सड़क किनारे बनी अस्थायी संरचनाओं, नाले के ऊपर बनाए गए हिस्सों और दुकान के बाहर निकले ढांचों को हटाया गया। अभियान के दौरान नगर निगम की टीम जेसीबी और कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंची और तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी। कई जगहों पर दुकानों के आगे लगे शेड, सीढ़ियां और अन्य निर्माण तोड़े गए। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई वीआईपी मूवमेंट को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए की गई थी, ताकि रास्ता पूरी तरह साफ रहे और किसी तरह की बाधा न हो। दुकानदारों ने जताई नारजगी इस कार्रवाई के बाद स्थानीय दुकानदारों में नाराजगी देखने को मिली। कई व्यापारियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम ने बिना पूर्व सूचना दिए अचानक कार्रवाई कर दी। जिससे उन्हें अपना सामान हटाने का मौका तक नहीं मिला। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि सभी दुकानों पर समान रूप से कार्रवाई नहीं की गई। दैनिक भास्कर से बात करते हुए 7 सैलून के मालिक प्रवीर पाण्डेय ने बताया कि- “बुधवार को नगर की अतिक्रमण हटाने वाली टीम ने बिना नोटिस दिए। हमारी दुकान की लोहे की सीढ़ी जो 3–4 फिट नाला पर लगी थी। उसको तोड़ मरोड़ दिया गया। मेरे साथ साथ ब्यूटी ब्लिस, बेरोजगार कैफे और मॉम्स बेकरी पर अतिक्रमण हटाने के दौरान तोड़ फोड़ किया गया। सीढ़ी के सहारे लगा ग्लास की रेलिंग भी ढह गया।” दुकानदार बोले- हजारों का नुकसान हुआ उन्होंने कहा कि- इस कार्रवाई में मुझे और अन्य दुकानदारों को हजारों रुपये का नुकसान हुआ है। मैं अपनी गलती मानता हूँ कि नाले पर सीढ़ी लगाई गई थी, लेकिन प्रशासन को सभी दुकानदारों के खिलाफ एक समान कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि उनकी दुकान से कुछ ही दूरी पर कई अन्य दुकानदार सड़क पर ही अतिक्रमण किए हुए हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अन्य दुकानदारों ने भी अपनी परेशानी साझा की। उनका कहना है कि दुकान ही उनके परिवार की आय का एकमात्र साधन है। अचानक हुई तोड़फोड़ से उन्हें आर्थिक झटका लगा है। अब उन्हें दोबारा मरम्मत कराने और दुकान को पहले जैसा बनाने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा, जिससे उनकी रोजमर्रा की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी। व्यापारियों का यह भी कहना है कि अगर पहले से नोटिस दिया जाता तो वे खुद ही अपना अतिक्रमण हटा लेते और इस तरह के नुकसान से बच सकते थे। उनका आरोप है कि प्रशासन ने जल्दबाजी में कार्रवाई की, जिससे छोटे व्यापारियों को नुकसान झेलना पड़ा। अपर नगर आयुक्त बोले- इस मामले में जब दैनिक भास्कर ने अपर नगर आयुक्त अतुल कुमार से बात की, तो उन्होंने कहा कि- “देखिए सीएम के कार्यक्रम को देखते हुए हमेशा सड़क किनारे के अतिक्रमण को हटाया जाता है। बुधवार को भी वही निर्देश दिया गया था। जो भी पीड़ित है अपनी समस्या बताएं उसके आधार पर जांच की जाएगी। अगर गलत तरीके से कार्रवाई हुई होगी तो कार्रवाई करने वाले लोगों पर ठोस कदम उठाया जाएगा।”

Leave a Reply