गोरखपुर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। नवरात्र और रामनवमी के दौरान बिजली आपूर्ति बनाए रखने में लगे संविदा और आउटसोर्स कर्मियों की प्रस्तावित छंटनी के खिलाफ समिति का कहना है कि 01 अप्रैल से बड़े स्तर पर की जा रही कार्रवाई से बिजली व्यवस्था और कर्मियों दोनों पर असर पड़ेगा। समिति ने कहा कि एक ओर संविदा कर्मी दिन-रात काम कर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें हटाने के नोटिस दिए जा रहे हैं। इससे कर्मियों में आक्रोश है और प्रबंधन की नीति पर सवाल उठ रहे हैं। मानदेय नीति से अलग कदम पर सवाल
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया गया कि प्रदेश सरकार अन्य विभागों में आउटसोर्स कर्मियों के लिए न्यूनतम 16 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है, जबकि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन इसके विपरीत छंटनी कर रहा है। समिति के अनुसार मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में लागू “वर्टिकल व्यवस्था” के तहत गोमतीनगर जोन में 679 के सापेक्ष 560 पद स्वीकृत कर 119 कर्मियों को हटाया गया। जानकीपुरम जोन में 795 के सापेक्ष 726 पद तय कर 69 कर्मियों को सेवा से बाहर किया गया। इस तरह दोनों जोनों में 188 कर्मियों की छंटनी हो चुकी है। पहले भी हटाए गए, अब और तैयारी
समिति ने बताया कि लेसा क्षेत्र में पहले ही 171 कर्मियों को हटाया जा चुका है। अब 01 अप्रैल 2026 से करीब 326 और संविदा कर्मियों को हटाने की तैयारी है, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि प्रबंधन खुद को आउटसोर्स निगम से अलग रखने की कोशिश कर रहा है, ताकि कर्मियों को शासन की ओर से मिलने वाली सुविधाओं और सुरक्षा का लाभ न मिले। अवकाश घोषित, फिर ड्यूटी का आदेश
समिति ने कहा कि रामनवमी पर दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित होने के बावजूद पहले अवकाश दिया गया और फिर उसी अवधि में ड्यूटी करने के निर्देश जारी कर दिए गए। इससे कर्मियों को न तो छुट्टी मिल रही है और न ही काम के अनुरूप सम्मान। समिति का कहना है कि जब भीषण गर्मी शुरू होने वाली है, ऐसे समय में कर्मचारियों की संख्या घटाना बिजली व्यवस्था के लिए भी जोखिम भरा कदम हो सकता है। मुख्यमंत्री से ये मांगें
समिति ने मांग की है कि संविदा और आउटसोर्स कर्मियों की चल रही और प्रस्तावित छंटनी पर तुरंत रोक लगाई जाए और हटाए गए कर्मियों को वापस लिया जाए। साथ ही न्यूनतम मानदेय लागू किया जाए, आउटसोर्स व्यवस्था से अलग करने के प्रस्ताव को निरस्त किया जाए और “वर्टिकल व्यवस्था” को खत्म किया जाए। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी।

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