गोरखपुर के सूरजकुंड इलाके में सोमवार को किन्नर समाज के लोगों ने जम कर हंगामा किया। बड़ी संख्या में पहुंचे किन्नरों ने मकान को चारों तरफ से घेर लिया और घर के बाहर ताला लगा दिया। इसके बाद वे बीच सड़क पर बैठ गईं। इस विरोध से इलाके में हलचल बढ़ गई और लोगों की भीड़ जमा हो गई। किन्नरों ने साफ कहा कि जब तक उन्हें मकान का कब्जा नहीं मिलेगा, वे वहां से नहीं हटेंगी। जानें क्या है पूरा मामला…
13 साल पहले शुरू हुआ था विवाद
यह विवाद गोरखपुर की पूर्व मेयर आशा देवी की सूरजकुंड स्थित करोड़ों की संपत्ति से जुड़ा है। जून 2013 में उनके निधन के तुरंत बाद ही यह मामला शुरू हो गया था। मुख्य विवाद इस बात को लेकर था कि आखिर संपत्ति का असली वारिस कौन है। आशा देवी की मौत के 24 घंटे के भीतर ही तीन पक्षों ने संपत्ति पर दावा कर दिया था। उनकी दत्तक बेटी मधु और दामाद रमेश ने खुद को वारिस बताया। दूसरी तरफ उनके सगे भाइयों ने परिवार का सदस्य होने के नाते हक जताया। वहीं किन्नर समाज ने कहा कि परंपरा के अनुसार किन्नर की संपत्ति उसके समाज और चेलों की होती है।
दामाद नहीं खली कर रहे मकान
उस समय हालात तब बिगड़ गए थे, विवाद को शांत कराने के लिए प्रशासन ने संपत्ति से जुड़े सभी मूल दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए थे और सभी पक्षों को उनकी प्रतियां देकर अपना पक्ष रखने का समय दिया था। बताया जा रहा है कि बाद में कोर्ट के आदेश के अनुसार मकान किन्नरों के नाम दर्ज हो गया। इसके बावजूद आरोप है कि आशा देवी के दामाद अशोक यादव अब तक मकान खाली नहीं कर रहे हैं। इसी वजह से यह विवाद लगातार बना हुआ है और एक फिर से सामने आ गया है।

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