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गोरखपुर में कल दिन-रात होंगे बराबर:मार्च इक्विनॉक्स से बदलेगा वेदर पैटर्न, स्प्रिंग सीजन होगा शुरू


                 गोरखपुर में कल दिन-रात होंगे बराबर:मार्च इक्विनॉक्स से बदलेगा वेदर पैटर्न, स्प्रिंग सीजन होगा शुरू

गोरखपुर में कल दिन-रात होंगे बराबर:मार्च इक्विनॉक्स से बदलेगा वेदर पैटर्न, स्प्रिंग सीजन होगा शुरू

गोरखपुर में कल यानी शुक्रवार को मार्च इक्विनॉक्स होने वाला है। यह पृथ्वी की पोजिशन में होने वाला एक अहम खगोलीय इवेंट है, जो डे-नाइट बैलेंस और सीजन चेंज को तय करता है। इस दिन दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में डे और नाइट लगभग बराबर होंगे और भारत समेत नॉर्दर्न हेमिस्फियर में स्प्रिंग सीजन की ऑफिशियल शुरुआत मानी जाएगी। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के एस्ट्रोनॉमर अमर पाल सिंह ने बताया कि यह इवेंट साइंटिफिक समझ और ऑब्जर्वेशन दोनों के लिए खास महत्व रखता है। रात 8:16 बजे होगा एक्जैक्ट इक्विनॉक्स मोमेंट
एस्ट्रोनॉमर के मुताबिक, मार्च इक्विनॉक्स शुक्रवार को रात 8:16 बजे (आईएसटी) पर होगा। इसी समय सन, सेलेस्टियल इक्वेटर को साउथ से नॉर्थ की ओर क्रॉस करेगा। यही वह एक्जैक्ट खगोलीय मोमेंट होता है, जहां से सीजनल ट्रांजिशन शुरू होता है। इस दिन अर्थ की एक्सिस ऐसी अलाइनमेंट में होती है कि नॉर्दर्न और साउदर्न हेमिस्फियर, दोनों ही सन से समान दूरी और एंगल पर रहते हैं। इसके चलते सनलाइट इक्वेटर पर लगभग सीधी पड़ती है और पूरी पृथ्वी पर लाइट लगभग बराबर डिस्ट्रिब्यूट होती है। इसी वजह से डे और नाइट लगभग इक्वल होते हैं, हालांकि एटमॉस्फेरिक रिफ्रैक्शन के कारण डे कुछ मिनट ज्यादा महसूस हो सकता है। स्प्रिंग सीजन की होगी एंट्री
इस खगोलीय इवेंट के बाद नॉर्दर्न हेमिस्फियर में स्प्रिंग सीजन की शुरुआत होती है। इसके साथ ही टेम्परेचर में बदलाव, डे की लंबाई बढ़ना और नेचर में बदलाव साफ नजर आने लगता है। वहीं साउदर्न हेमिस्फियर में ऑटम सीजन शुरू हो जाता है। अमर पाल सिंह के अनुसार, प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान में इसे ‘बसंत संपात’ कहा जाता था और इसे नई शुरुआत का समय माना जाता था। ईरान में इसी दिन ‘नौरोज’ के रूप में न्यू ईयर सेलिब्रेट किया जाता है। माया सभ्यता में भी इक्विनॉक्स का सटीक उपयोग उनके कैलेंडर और आर्किटेक्चर में देखने को मिलता है। हर साल डेट क्यों होती है अलग
इक्विनॉक्स की डेट हर साल 19, 20 या 21 मार्च के बीच बदलती रहती है। इसका कारण अर्थ की ऑर्बिट का समय (करीब 365.2422 दिन) और कैलेंडर के 365/366 दिन के बीच का फर्क है। इसी अंतर को बैलेंस करने के लिए लीप ईयर जोड़ा जाता है। इस दिन नॉर्थ पोल पर 6 महीने के डे की शुरुआत होती है, जबकि साउथ पोल पर 6 महीने की नाइट शुरू हो जाती है। साथ ही सन लगभग एक्जैक्ट ईस्ट से राइज और वेस्ट में सेट होता है, जिससे डायरेक्शन पहचानना सबसे आसान होता है। ऑब्जर्वेशन के लिए परफेक्ट दिन
एस्ट्रोनॉमर के अनुसार, यह दिन प्रैक्टिकल ऑब्जर्वेशन के लिए बेस्ट होता है। लोग सनराइज और सनसेट के समय अपनी शैडो की दिशा और लंबाई देखकर इस खगोलीय बदलाव को आसानी से समझ सकते हैं। इक्वेटर के आसपास कुछ जगहों पर दोपहर के समय शैडो लगभग जीरो हो जाती है। इसके अलावा बर्ड्स और एनिमल्स की माइग्रेशन पर भी इसका असर पड़ता है। कुछ मामलों में सैटेलाइट कम्युनिकेशन पर हल्का सोलर आउटेज भी देखा जा सकता है।


Sourse: Dainik Bhaskar via DNI News

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