गोरखपुर की रहने वाली दिव्या सिंह ने साइकिल से माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 24 मार्च को 17,560 फीट की ऊंचाई पर स्थित बेस कैंप तक पहुंचते ही वह भारत की पहली और दुनिया की दूसरी महिला बन गईं। उस समय वहां तापमान माइनस 12 डिग्री दर्ज किया गया। उनकी इस सफलता से गोरखपुर का नाम देशभर में चर्चा में आ गया है। दरअसल, दिव्या सिंह पिपरौली ब्लॉक के बनौड़ा गांव की हैं। वह पेशे से शिक्षक हैं, लेकिन साइक्लिंग और ट्रैकिंग उनका जुनून है। उन्होंने अपनी तैयारी खुद की मेहनत और अभ्यास से की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बड़े लक्ष्य तय किए और उन्हें पूरा कर दिखाया। यह उनकी लगन और मजबूत इरादों का परिणाम है। विकास भवन से हुई शुरुआत इस अभियान की शुरुआत विकास भवन से हुई, जहां जिला समाज कल्याण अधिकारी वशिष्ठ नारायण सिंह, डीसी मनरेगा रघुनाथ सिंह और डीपीआरओ नीलेश प्रताप सिंह समेत अन्य अधिकारियों ने उन्हें हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अधिकारियों ने उनकी इस पहल की सराहना की और शुभकामनाएं दीं। दिव्या सिंह ने 16 मार्च को काठमांडू से अपनी साइकिल यात्रा शुरू की। उन्होंने सलेरी, सुरखे, फॉकडिंग, सागरमाथा नेशनल पार्क, नामचे बाजार, डीबोचे, फिरचे, लोबुचे और गोरखशेप जैसे ऊंचाई वाले और कठिन रास्तों से होते हुए एवरेस्ट बेस कैंप तक का सफर तय किया। यह पूरा सफर 14 दिन में पूरा हुआ, जिसमें हर दिन नई चुनौती सामने आई। बर्फ, बारिश- ठंड ने बढ़ाई परेशानी इस यात्रा के दौरान मौसम सबसे बड़ी चुनौती रहा। लगातार बर्फबारी और बारिश होती रही, कई बार पूरे दिन यही स्थिति बनी रही। तेज ठंडी हवाएं चलती रहीं और दिन में भी तापमान माइनस में चला जाता था। कई जगह रास्ता इतना खराब था कि उन्हें साइकिल को कंधे पर उठाकर चलना पड़ा। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी भी महसूस होने लगी। सांस लेने में दिक्कत होती थी और हृदय गति 120 प्रति मिनट तक पहुंच जाती थी। शरीर थका हुआ रहता था, लेकिन इसके बावजूद दिव्या सिंह ने हार नहीं मानी और रोजाना 10 से 12 घंटे तक साइक्लिंग करती रहीं।

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