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गैस की किल्लत से रेस्टोरेंट पर कम हुए कर्मचारी:संचालकों ने बताया- समोसे समेत कई आइटम की बिक्री कम, कोयले और लकड़ियों का ले रहे सहारा

शहर के मिष्ठान भंडारों और छोटे रेस्टोरेंट्स में गैस की भारी किल्लत के कारण संचालन में गंभीर दिक्कतें सामने आ रही हैं। संचालकों का कहना है कि गैस की उपलब्धता बेहद मुश्किल हो गई है, जिससे कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बक्सर में मिष्ठान भंडार के संचालक के मुताबिक, पहले जो गैस सिलेंडर 800–900 रुपये में मिल जाता था, अब वह 2000 रुपये में भी आसानी से नहीं मिल रहा। कई बार मजबूरी में 3800 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। गैस की कमी के चलते अब कोयले और लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है, लेकिन लगातार बारिश के कारण इससे भी काम प्रभावित हो रहा है। पहले जहां दुकानों पर 10–12 कर्मचारी काम करते थे, वहीं अब काम कम होने और लागत बढ़ने के कारण यह संख्या घटकर 5–6 रह गई है। संचालकों का कहना है कि गैस के साथ-साथ रिफाइंड तेल और अन्य जरूरी सामानों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। रोजमर्रा की चीजों में प्रति किलो 10 रुपये तक की बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। सुबह गैस एजेंसियों पर लंबी लाइन लगती है, लेकिन समय पर सिलेंडर नहीं मिल पाता। IIMT के पास श्री कृष्णा रेस्टोरेंट चलाने वाले अमित ने बताया, “सबसे ज्यादा परेशानी गैस की है। हर चीज महंगी हो गई है, लेकिन गैस सबसे बड़ी समस्या बन गई है। हम कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं, जिनके रेट अब तय नहीं हैं। एक सिलेंडर के लिए 2200 से 2500 रुपये तक देने पड़ रहे हैं, जबकि पहले यह करीब 1800 रुपये में मिल जाता था। महीने में करीब 20 सिलेंडर की जरूरत होती है।” उन्होंने बताया कि खर्च कम करने के लिए कई ऐसे आइटम बंद करने पड़े हैं जिनमें ज्यादा गैस लगती थी। “समोसे जैसे कई आइटम बनाना बंद कर दिया है और जो संभव है वही बना रहे हैं। कुछ चीजों के दाम भी बढ़ाने पड़े हैं,” उन्होंने कहा। वहीं, गंगानगर स्थित गर्ग समोसे के संचालक ने बताया कि पहले वे रोज करीब 1000 समोसे बेच लेते थे, लेकिन गैस की दिक्कत के चलते अब यह संख्या घटकर 400–500 रह गई है। उन्होंने दुकान पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी कम कर दी है और अब भट्टी (कोयला/लकड़ी) से काम चलाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, बढ़ती लागत के बावजूद कई दुकानदारों ने ग्राहकों को राहत देने के लिए कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की है। कुछ पुराने रेट अब भी जस के तस रखे गए हैं, ताकि आम लोगों पर ज्यादा बोझ न पड़े। संचालकों ने सरकार से सवाल उठाते हुए कहा है कि गैस संकट कब तक बना रहेगा और इसका समाधान कब होगा। फिलहाल गैस की कमी और खराब मौसम के चलते कारोबार प्रभावित हो रहा है, जिससे दुकानदारों के साथ-साथ आम लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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