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गैस किल्लत, महिला बोली- बच्चे भूख से तड़प रहे:कानपुर में निडिल लगाए एजेंसी पर भटक रही महिला, ब्लैक में 3 हजार में मिल रहा सिलेंडर

कानपुर में गैस किल्लत से परेशान लोग लगातार एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। एक महिला ने बताया- हमारे बच्चे भूख से तड़प रहे हैं। कल्याणपुर में एक महिला ने बताया- हम 7 दिनों से एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। अब एजेंसी पर बीमर लोग सिलेंडर के लिए लाइन में लग रहे हैं। जेके मंदिर के पास भगवत इंडेन गैस एजेंसी का शटर तक नहीं उठा। लोग 7 दिनों से एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। गैस किल्लत की 3 तस्वीरें देखिए DAC नंबर मिलने के बाद पर्ची के लिए लाइन लगानी पड़ रही
कल्याणपुर स्थित सत्य साईं गैस एजेंसी पर पहुंचे 60 वर्षीय नरेंद्र कुमार ने बताया- 17 मार्च को सिलेंडर बुक कराया था। इसके बाद लगातार आ रहे हैं। गुरुवार को DAC नंबर मिल गया है। अब पर्ची कटाने के लिए लाइन में खड़े हैं। आज सिलेंडर मिलने की उम्मीद है, लेकिन अभी तक तो नहीं मिला है। मोहम्मद रफीक बताते है, 7 दिनों से चक्कर लगा रहे हैं। सिलेंडर नहीं मिल रहा है। 7 दिनों से लगातार लाइन में लग रहे हैं। एजेंसी वाले कह रहे हैं- मिल जाएगा। लेकिन कब मिलेगा ये पता नहीं है। गोद में बच्चे को लेकर ताहिरा सत्य साई गैस एजेंसी पर पहुंची। वो बताती हैं, तीन दिन पहले सिलेंडर बुक कराया है। फोन पर मैसेज आ गया, लेकिन पर्ची के लिए यहां खड़े हुए हैं। हमारे घर में कोई नहीं है, हम यहां किसके साथ आते। खाने के लिए सिलेंडर जरूरी है, बताओ क्या करें। अभी तो पता नहीं है, सिलेंडर कब मिलेगा। गोद में एक छोटा बच्चा है, अभूत परेशानी हो रही है। विष्णु बोले- ब्लैक में 3 हजार में सिलेंडर मिल रहा विष्णु कुमार गुप्ता ने बताया- अगर शहर में गैस नहीं है तो गैस ब्लैक में कैसे बिक रही है। ब्लैक में 3 हजार रुपए में सिलेंडर बिक रहा है। अब गैस एजेंसी वाले ग्राहकों का फोन नहीं उठाते हैं। एक हफ्ते पहले सिलेंडर बुक किया था, लेकिन अभी तक सिलेंडर नहीं आया है। खाना की दिक्कत है, ड्यूटी पर भी नहीं जा पा रहे हैं। गैस एजेंसी वाले कुछ बताते नहीं हैं। अगर शहर में पर्याप्त गैस है तो एजेंसियों पर भीड़ क्यों है। हम लोग मजदूर हैं, एक दिन दिहाड़ी नहीं मिलेगी, तो दूसरे दिन भूखे रहेंगे। इस समय घर में एक टाइम खाना बन रहा है। तीन टाइम तक उसी को खाते हैं। घर में खाना चूल्हे में बनता है, जिससे अस्थमा के मरीज परेशान हो रहे हैं। साजदा खातून बताती हैं- मैं यहां गैस के लिए एक हफ्ते से आ रही हूं और खाली चली जाती हूं। अब घर में बच्चे भूख से तड़प रहे हैं। हम लोगों को सिलेंडर नहीं मिलेगा तो खाना कैसे बन पाएगा। अब सरकार भी कोई हेल्प नहीं कर रही हैं। धुआं होने से बीमार पड़ रहे हैं। एक हफ्ते से लगातार आ रहे हैं, आने जाने में 800 से 900 रुपए खर्च हो गए हैं। घर में कमाने वाला बीमार पड़ा है। बताओ हम कहां से क्या करें। गैस एजेंसी वालों ने कल बोल दिया आज आने के लिए, लेकिन आज एजेंसी बंद है। सरकार पैसे वालों को सिलेंडर दे रही है, गरीबों को कहां मिल रहा है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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